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रामनाथ गोयनका पुरूस्कार: “पुरूस्कार मिलना सम्मान की बात लेकिन मोदी से नहीं ले सकता”

नई दिल्ली: पत्रकारिका के क्षेत्र में काम करने वाले हर शख्स का ये ख्व़ाब होता है कि उसे रामनाथ गोयनका पुरूस्कार मिले. इस तरह के पुरूस्कार आपके काम की तारीफ़ और आपका हौसला दोनों ही बढाते हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पत्रकार अक्षय मुकुल को भी ये प्रतिष्ठित सम्मान हासिल हुआ है लेकिन वो इस अवार्ड को ख़ुद नहीं लेना चाहते. उनका कहना है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इस पुरूस्कार को स्वीकार नहीं कर सकते. इसी कारणवश उन्होंने अपना पुरुस्कार लेने अपनी तरफ़ से एक मित्र को भेज दिया.

अक्षय पुरूस्कार समारोह में ही शामिल नहीं हुए. न्यूज़पोर्टल कैच से बातचीत में मुकुल ने कहा कि ये सम्मान पाकर उन्हें काफ़ी सम्मान महसूस हो रहा है. उन्होंने कहा कि मुझे बेहद ख़ुशी है कि मुझे ये पुरूस्कार मिला है लेकिन मैं ये पुरूस्कार नरेंद्र मोदी के हाथों नहीं ले सकता.

उन्होंने कहा कि पुरूस्कार को लेकर उनके मन में किसी तरह का कोई असम्मान नहीं है लेकिन वो उस शक्सियत से पुरूस्कार नहीं ले सकते जिससे उन्हें लेने को कहा जा रहा है.

अक्षय मुकुल टाइम्स ऑफ़ इंडिया में मानव संसाधन विकास मंत्रालय कवर करते हैं.

ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ मुकुल ही नरेंद्र मोदी के पुरूस्कार देने से नाराज़ हैं, कई और वरिष्ट पत्रकारों ने भी इस बात पर नाराज़गी जताई है और कहा है कि पहले तो प्रधानमंत्री के हाथों वितरण होना नहीं चाहिए और फिर मोदी ऐसे नेता हैं जो “कम्युनल पोलराईज़ेशन” के लिए जाने जाते हैं.

गौरतलब है कि रामनाथ गोयनका पुरस्कार पत्रकारिता के क्षेत्र में दिया जाने वाला देश का प्रतिष्ठित पुरस्कार है. इंडियन एक्सप्रेस समूह के संस्थापक रामनाथ गोयनका की याद में दिया जाने वाले इसके पुरस्कार समारोह की अध्यक्षता प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति या देश के मुख्य न्यायाधीश करते हैं.

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