Wednesday , June 28 2017
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अहम मामलों में पत्रकारिता की प्रशंसा की

नई दिल्ली। पत्रकारिता का हमारे देश में लंबा इतिहास है। आजादी के आंदोलन से लेकर सामाजिक सुधार और अन्य महत्वपूर्ण मामलों की दिशा तय करने में पत्रकारिता की बड़ी भूमिका रही है।

खास तौर पर प्रिंट पत्रकारिता का अपना प्रभाव रहा है। क्योंकि एक अच्छा संपादकीय, एक अच्छी खोजपरक खबर या किसी सामाजिक मुद्दे पर एक लेख पाठकों के मस्तिष्क पर सीधा असर करता है।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सोमवार को कांस्टीट्यूशन क्लब स्थित मावलंकर सभागार में पत्रिका समूह के संस्थापक कर्पूर चन्द्र कुलिश की स्मृति में दिए जाने वाले केसी कुलिश इंटरनेशनल अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म पुरस्कार कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रपति ने अपनी युवावस्था का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) से प्रकाशित इत्तेफाक के एक आलेख ने उन्हें शिक्षक की नौकरी छोड़कर सार्वजनिक जीवन में उतरने के लिए प्रेरित किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि आप लोगों को यह जानकर शायद आश्चर्य होगा कि कई महत्वपूर्ण समाज सुधारकों ने अपना संदेश आमजन तक पहुंचाने के लिए समाचार पत्रों का सहारा लिया है। राजा राममोहन राय ने 1819 में समाचार चंद्रिका और मिरातुल उल अखबार निकाला था। महात्मा गांधी ने यंग इंडिया व हरिजन समाचार पत्रों का संपादन किया था।

आज भी कई प्रमुख राजनेता खुद लेख लिखते हैं। खासकर कम्यूनिस्ट मूवमेंट से निकलकर आए नेता अपने विचार पार्टी के मुखपत्र एवं अन्य मु?य धारा के समाचार पत्रों में लेखों के जरिए व्यक्त करते हैं। इनमें से कई बेहतरीन लेखक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि तकनीकी से मीडिया का बेहद गहरा नाता है, चाहे वह प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। तकनीक की वजह से मीडिया की पहुंच बढ़ी है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे समय में टीवी डिबेट के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता था कि कौन बेहतर वक्ता है? लेकिन अब टीवी पर होने वाले कार्यक्रमों से आप अच्छे वक्ता, अच्छा वाद-विवाद करने वाले लोगों को पहचान सकते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे खुशी है कि मुझे यह पुरस्कार प्रदान करने का अवसर मिला।

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