Friday , August 18 2017
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राष्ट्रपिता पर आम्बेडकर युनिवर्सिटी में बहस

लखनऊ। ज्योतिराव फूले या फिर मोहनदास करमचंद गांधी? दोनों में किसे भारत का ‘राष्ट्रपिता’ कहा जाए? अगर आपके लिए यह चुनाव विवादास्पद है, तो फिर यह जान लीजिए राष्ट्रपिता के ऊपर छिड़ी इस बहस में आखिरी फैसला बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी के कुलपति आर.सी. सोबती के हाथों में है। दोनों में से किसे राष्ट्रपिता माना जाए, इसे तय करने के लिए एक समिति का भी गठन किया गया था, लेकिन बुधवार को समिति के सदस्यों के वैचारिक मतभेदों के कारण कोई फैसला नहीं लिया जा सका। ऐसे में अब समिति ने इस विवाद का फैसला कुलपति के ऊपर छोड़ दिया है।

यह विवाद उस समय सामने आया, जब कि यूनिवर्सिटी के सिद्धार्थ छात्रावास में रहने वाले कुछ दलित छात्रों ने समाज सुधारक ज्योतिराव फूले की एक तस्वीर को ‘राष्ट्रपिता’ की उपाधि के साथ छात्रावास परिसर में लगा दिया। उसके बाद से ही यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले जनरल व OBC वर्ग के छात्र इसका विरोध कर रहे हैं। विरोध कर रहे इन छात्रों का कहना है कि केवल महात्मा गांधी को ही राष्ट्रपिता कहा जा सकता है।

आंबेडकर यूनिवर्सिटी दलित छात्रसंघ (AUDSU) की कोर समिति के सदस्य श्रेयत बौद्ध ने कहा, ‘भारत जैसे एक लोकतांत्रिक देश में हर किसी के पास अभिव्यक्ति व विचारों की स्वतंत्रता है। किसी एक धड़े के लोग औरों पर गांधी को राष्ट्रपिता कहने के लिए दबाव क्यों बनाएं?’

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