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बंगाल: राष्ट्रीय एकता की अनोखी मिसाल, मुसलमानों ने हिन्दू भाइयों के लिए बनाया पूजा पंडाल

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले के धरन गांव जो मुस्लिम बाहुल्य है यहां मुद्दतों से दुर्गा पूजा का पंडाल नहीं लगाया जाता है। यहां के हिन्दू दुर्गा पूजा मनाने के लिए हर साल अपने प्रिय व संबंधी के यहाँ चले जाते और दुर्गा पूजा मनाने के बाद वह गांव वापस आते थे.

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मगर इस साल गांव के निवासी शकूर अली मिर्जा ने अपने हिन्दू दोस्तों के लिए पूजा स्थल बनाने का फैसला किया है जिसका समर्थन गांव की पूरी आबादी ने की है।
परदेश 18 के अनुसार शकूर अली ने कहा कि हर साल पूजा के अवसर पर यहां के हिन्दू भाइ को त्योहार मनाने के लिए दूसरा गांव जाना पड़ता है। हम लोग कई सालों से इस को महसूस कर रहे थे कि गांव की हिंदू आबादी इसकी वजह से दुखी रहती है कि उन्हें पूजा केलिए पंडाल लगाने की अनुमति नहीं है। इस लिए इस साल हम लोगों ने दुर्गा पूजा मनाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि हम ईद और ईद अल अजहा की तरह दुर्गा पूजा भी हिंदू भाइयों के साथ मनाना चाहते हैं। इसमें कोई राजनीति नहीं है। हम धार्मिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त नहीं हैं. बरदवान आराम बाग रोड पर पूजा पंडाल बनाया जा रहा है।
पूजा कमीटी के बसुदीब कनदो ने कहा कि शकूर अली ने हमारे सपनों को पूरा कर दिया है. हम सभी के लिए यह खुशी का विशेष अवसर है. हिन्दू और मुस्लिम दोनों मिलकर काम कर रहे है . गाँव की यास्मीन बीबी ने कहा कि इस समय गांव की सभी महिलायें चाहे हिन्दू हो या मुसलमान सब बहुत ही ज्यादा व्यस्त हैं. दुर्गा पूजा की तैयारियों में एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं. पूजा पंडाल लगाने में सब मिलकर काम कर रहें। एक ऐसे समय में जब देश भर में सांप्रदायिकता को फैलाने और धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की नापाक कोशिश हो रही है ऐसे में बर्दवान जिले के धरन के निवासियों ने देश के सामने एक बड़ी मिसाल कायम कर दी है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के कंगला पहाड़ी गांव से संबंधित राष्ट्रीय मीडिया विशेषकर एक अंग्रेजी न्यूज चैनल और एक हिंदी न्यूज चैनल ने यह खबर दिखलाई थी कि इस गांव में हिन्दुओं को पूजा स्थल लगाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस खबर पर बहस भी कराया गया था । इस को दादरी जैसे गंभीर त्रासदी से तुलना भी किया गया था।

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