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राष्ट्रीय कौंसिल का फैसला, उर्दू कानूनी टर्मनालोजी सिखाने के लिए शुरू किया जाएगा कोर्स

दिल्ली: उर्दू भाषा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कौंसिल ने कानूनी टर्मनालोजी सिखाने के लिए नया पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है. कौंसिल के कानूनी पैनल ने पंद्रह से बीस दिनों पर आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने की सिफारिश की है, ताकि कानूनी भाषा में वकील और न्यायिक कर्मचारी को उर्दू भाषा की कानूनी शब्दों से परिचित कराया जा सके.

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय कौंसिल कार्यालय में कानूनी पैनल के सदस्यों की बैठक के एजेंडे पर विचार विमर्श किया गया. बैठक में कानूनी किताबों के प्रकाशन, नई किताबें और परियोजना शुरू करने पर भी चर्चा हुई. बैठक के दौरान कानूनी सामग्री पर आधारित कई पुस्तकों को हरी झंडी दिखाई गई. इसके अलावा अगले महीने उर्दू की संवैधानिक स्थिति पर होने वाले सेमीनार पर भी मुहर लगाई गई.

हालांकि बैठक के दौरान प्रस्ताव आया कि राष्ट्रीय परिषद वकीलों और न्यायिक कर्मचारी को उर्दू कानूनी टर्मनालोजी सिखाने पर काम करे, जिसके बाद रिफ्रेशर कोर्स शुरू करने का फैसला किया गया है.

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