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रियासत की तक़सीम के ख़िलाफ़ सीमा आंध्र बर्क़ी मुलाज़मीन हड़ताल के फ़ैसले पर अटल

आंध्र राइलसीमा इलाके के मुलाज़मीन बर्क़ी की जवाइंट एक्शण कमेटी ( जय ए सी ) ने चीफ़ मिनिस्टर के दफ़्तर की तरफ़ से किए गए दावा से मुतज़ाद मौक़िफ़ इख़तियार करते हुए आज रात देर गए एलान किया कि आंध्र प्रदेश की तक़सीम के ख़िलाफ़ निस्फ़ शब से 72 घंटों की

आंध्र राइलसीमा इलाके के मुलाज़मीन बर्क़ी की जवाइंट एक्शण कमेटी ( जय ए सी ) ने चीफ़ मिनिस्टर के दफ़्तर की तरफ़ से किए गए दावा से मुतज़ाद मौक़िफ़ इख़तियार करते हुए आज रात देर गए एलान किया कि आंध्र प्रदेश की तक़सीम के ख़िलाफ़ निस्फ़ शब से 72 घंटों की हड़ताल शुरू की जा चुकी है।

चीफ़ मिनिस्टर के दफ़्तर से आज जारी बयान में कहा गया था कि मुलाज़मीन बर्क़ी ने 2 सितंबर जुमेरात से शुरू की जाने वाली अपनी ग़ैर मुअयना हड़ताल को मोख़र करने से इत्तिफ़ाक़ करलिया है ताहम जय ए सी के क़ाइदीन ने वज़ाहत की के आज रात से वो 72 घंटे की हड़ताल करेंगे।

सीमा आंध्र बर्क़ी मुलाज़मीन के जे ए सी क़ाइदीन ने कहा कि हमें चीफ़ मिनिस्टर के दफ़्तर से जारी करदा बयान से कोई सरोकार नहीं है, हम हड़ताल शुरू कररहे हैं लेकिन रेलवेज़, हॉस्पिटल्स और आबरसानी सकीमात के लिए बर्क़ी की सरबराही को यक़ीनी बनाया जाएगा।

चीफ़ मिनिस्टर ने अपने कैंप ऑफ़िस पर आज शाम जय ए सी क़ाइदीन से बातचीत की थी और उन से अपनी हड़ताल वापिस लेने की ख़ाहिश का इज़हार किया था।

मौसूला इत्तेलाआत में बताया गया था कि चीफ़ मिनिस्टर से बातचीत के बाद सीमा आंध्र के बर्क़ी मुलाज़मीन की जवाइंट एक्शण कमेटी ने 12 सितंबर से शुरू की जाने वाली ग़ैर मुअयना मुद्दत की हड़ताल को 16 सितंबर तक मोख़र करने से इत्तिफ़ाक़ करलिया है।

रियासत के सरकरदा बर्क़ी इदारों, ए पी जीनको, ए पी ट्रांस्को और डिस्कॉमस ने बर्क़ी मुलाज़मीन से खुले आम अपील की थी कि मफ़ाद-ए-आम्मा की ख़ातिर वो अपनी मुजव्वज़ा हड़ताल से दस्तबरदार होजाएं।

ए पी जीनको के चैरमैन-ओ-मैनेजिंग डायरेक्टर के वजय आनंद और सी पी डी सी एल के चैरमैन-ओ-मैनेजिंग डायरेक्टर सयद अली मुर्तज़ा रिज़वी, ट्रांस्को के चैरमैन-ओ-मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेश चंदा ने एक प्रेस कांफ्रेंस से ख़िताब करते हुए कहा कि रियासत पिछ्ले दो साल से बदतरीन बर्क़ी और मालीयाती बोहरान से गुज़र रही है।

क़ुदरती गैस की शदीद क़िल्लत और बिजली घरों के ज़ख़ाइर में पानी की घटती सतह है। चंदा ने कहा कि अगरइंजिनियरस और मुलाज़मीन की कसीर तादाद हड़ताल पर चली जाती है तो इस से ग्रिड सिस्टम मुतास्सिर होसकता है और सारिफ़ीन की ख़िदमात बुरी तरह मुतास्सिर होंगी और तवानाई तंसीबात की माली हालत अबतर होगी।

उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ़ तवानाई की ज़रूरत ही नहीं है बल्कि ग्रिड को मुनासिब अंदाज़ में चलाने के लिए अफ़रादी क़ुव्वत की ज़रूरत भी है लेकिन हड़ताल से बर्क़ी पैदावार और सरबराही दोनों ही यकसाँ तौर पर मुतास्सिर होंगे।

चीफ़ मिनिस्टर एन किरण कुमार रेड्डी ने भी आज शाम तमाम सरकारी मुलाज़मीन, टीचर्स और दुसरे हड़तालियों से अपील की के वो लाज़िमी ख़िदमात को मुतास्सिर ना करें और सरकारी ख़िदमात की पुरसुकून अंदाज़ में इतमीनान बख़श कारकर्दगी को यक़ीनी बनाने के लिए ओहदेदारों से तआवुन करें।

चीफ़ मिनिस्टर ने चीफ़ सेक्रेटरी पी के मोहंती और दुसरे आला ओहदेदारों को हिदायत की के वो मुताल्लिक़ा मुलाज़मीन से बातचीत करें और उन्हें लाज़िमी ख़िदमात की एहमीयत के बारे में समझाएं।

चीफ़ मिनिस्टर ने मुताल्लिक़ा ओहदेदारों पर ज़ोर दिया कि तमाम स्कूलों, कॉलेजों और तालीमीइदारा जात की दुबारा कुशादगी की मसाई करें क्यूंकि इन इदारों से लाखों तलबा-ए-ओ- तालिबात का मुस्तक़बिल वाबस्ता है।

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