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रियास्ती बजट में अक़ल्लीयतों को नजरअंदाज़ करने की पालिसी

हैदराबाद १‍७ फरवरी (सियासत न्यूज़) आंधरा प्रदेश में रियास्ती हुकूमत की जानिब से अक़ल्लीयतों केलिए मुख़तस होने वाले बजट में इज़ाफ़ा केलिए ये ज़रूरी है कि अवाम में बजट के मुताल्लिक़ शऊर बेदार हो।

हैदराबाद १‍७ फरवरी (सियासत न्यूज़) आंधरा प्रदेश में रियास्ती हुकूमत की जानिब से अक़ल्लीयतों केलिए मुख़तस होने वाले बजट में इज़ाफ़ा केलिए ये ज़रूरी है कि अवाम में बजट के मुताल्लिक़ शऊर बेदार हो।

उल्मा किराम ,मशाइख़ीन उज़्ज़ाम ,आइमा-ओ-ख़तीबहज़रात को चाहिए कि वो बजट के मुताल्लिक़ अवाम में शऊर बेदार करते हुए उन्हें अपना हक़ हासिल करने की तरग़ीब दें । नमाज़ जुमा से क़बल आइमा-ओ-ख़तीब हज़रात अपने ख़ुत्बों में उम्मत मुहम्मदी (सल.) को इस बात की तलक़ीन कर सकते हैं कि वो अपनेहुक़ूक़ केलिए किस तरह से जद्द-ओ-जहद कर सकते हैं ।

रियास्ती हुकूमत की जानिब से अक़ल्लीयतों को नज़रअंदाज करने की पालिसी के ख़ातमा केलिए ये ज़रूरी है कि अक़ल्लीयतें अपने हुक़ूक़ से आगही हासिल करते हुए अपनी तरक़्क़ी , फ़लाह-ओ-बहबूद केलिए अज़ ख़ुद जद्द-ओ-जहद करने तैय्यार होजाएं। रियास्ती मुवाज़ना में अक़ल्लीयतों कोफ़राहम किए जाने वाले बजट और अक़ल्लीयतों की आबादी के दरमयान मौजूद फ़र्क़ से येअंदाज़ा होता है कि हुकूमत किस तरीक़ा से अक़ल्लीयतों के मुफ़ादात को कुचलने की फ़िराक़ में हैं ।

आंधरा प्रदेश में पसमांदा तबक़ात और दर्ज फ़हरिस्त अक़्वाम के इलावा दर्ज फ़हरिस्त क़बाइल को जो बजट हासिल है इस का एक फ़ीसद हिस्सा भी अक़ल्लीयतों के हिस्सा में नहीं आता जबकि अक़ल्लीयतों में ना सिर्फ मुस्लमान बल्कि ईसाई , सुख ,जैन और बुध मत के मानने वाले भी शामिल हैं ।

रियासत में मौजूद 12 फ़ीसद अक़ल्लीयतों केलिए 300 करोड़ रुपय बजट से ये बात वाज़िह होजाती है के हुकूमत कि सिर्फ ज़बानीदावे अक़ल्लीयतों को तरक़्क़ी से हमकनार नहीं करसकते । इसी लिए बहैसीयत दूसरी बड़ीअक्सरीयत मुस्लमानों को चाहीए कि वो आगे बढ़ कर अपने हुक़ूक़ हासिल करने केलिए जद्द-ओ-जहद करें चूँकि जब तक हम अपनी फ़लाह-ओ-बहबूद केलिए आवाज़ नहीं उठाते उस वक़्त तक हमें नज़रअंदाज करने की पालिसी का सिलसिला जारी रहेगा ।रियास्ती हुकूमत के मुवाज़ना मुसावी हिस्सा हासिल करने केलिए अक़ल्लीयतों बिलख़सूस मुस्लमानों को चाहिए कि वो अपने वजूद का एहसास दिलाते हुए अपनी तरक़्क़ी के लिए मंसूबा बंदी काआग़ाज़ करें । अगर मुस्लमान बहैसीयत मजमूई रियासत में अपने वजूद का एहसास दिलाने में कामयाब होते हैं तो उन्हें 300 के बजाय 3000 करोड़ रुपय का बजट हासिल करने से कोई ताक़त नहीं रोक सकती क्योंकि मुस्लमानों की पसमांदगी के मुताल्लिक़मर्कज़ी हुकूमत की जानिब से तशकील दी गई सच्चर कमेटी के इलावा रंगनाथ मिश्रा कमीशन ने मुस्लमानों की हालत-ए-ज़ार जो पेश की है इस के बाद हुकूमत की ज़िम्मेदार य है कि मुस्लमानों में मौजूद मआशी-ओ-तालीमी बदहाली को दूर करने केलिए इक़दामात करे ।

नमाज़ जुमा से क़बल आइमा-ओ-ख़तीब हज़रात अगर मिल्लत-ए-इस्लामीया में इस बात केमुताल्लिक़ शऊर बेदार करेता कि मिल्लत-ए-इस्लामीया अपने हुक़ूक़ हासिल करने की

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