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रिहाई मंच नेताओं को पीटने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मंच ने डीजीपी को सौंपा ज्ञापन

विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने व्यक्त किया रोष, बताया इसे लोकतंत्र पर हमला

लखनऊ : भोपाल में सिमी से सम्बंधित होने के आरोपियों की फर्जी मुठभेड में हत्या के खिलाफ धरना दे रहे रिहाई के महासचिव राजीव यादव और लखनऊ यूनिट के महासचिव शकील कुरैशी की पुलिस द्वारा पिटाई के सवाल पर आज डीजीपी कार्यालय में दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ मंच के नेताओं ने कार्रवाई हेतु ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मुख्य तौर पर इस मामले में आरोपी बनाए गए पुलिसकर्मियों ओंकार नाथ यादव और विजय कुमार पांडे को निलम्बित करने की मांग के साथ ही आतंक के आरोप में विभिन्न जेलों में बंद आरोपियों की सुरक्षा की गांरटी की मांग की गई है।

ज्ञापन सौंपने में रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब, अलग दुनिया के केके वत्स, काॅर्ड के अतहर हुसैन, रफत फातिमा, शकील कुरैशी, शाहनवाज आलम, लक्ष्मण प्रसाद, शम्स तबरेज, सरफराज कमर अंसारी, विनोद यादव शामिल रहे।

इससे पहले कल शाम इसी मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की बैठक कैसरबाग स्थित सीपीआई कार्यालय पर हुई। वैठक में शामिल नेताओं ने रिहाई मंच के धरने पर हमले को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए इसे पुलिस की साम्प्रदायिक कार्रवाई बताया और इस मुद्दे पर आंदोलन की रणनीति बनाई।

प्रोफेसर रमेश दीक्षित की अध्यक्षता में हुई बैठक में इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश ने कहा कि इस घटना ने साबित कर दिया है कि अपने को सेकूलर कहने वाली सपा और मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के रवैये में कोई फर्क नहीं है। माकपा के प्रवीण ने कहा कि पुलिस के ऐसे रवैये से लोकतंत्र कलंकित होता है। ऐसी घटनाएं संविधान प्रदत अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला हैं। भाकपा माले के राजीव ने कहा कि सपा सरकार में संघ परिवार के गुंडों को तो आजादी है लेकिन जनवादी और प्रगतिशील आवाजों को लगातार दबाया जा रहा है। मुस्लिम महिला आंदोलन की नाईस हसन ने इस मुद्दे पर व्यापक जनआंदोलन चला कर सरकार को बेनकाब करने की बात की। कोर्ड के अतहर हुसैन और अलग दुनिया के केके वत्स ने पुलिसिया गुंडागर्दी के खिलाफ लोगों के बीच जाने का सुझाव दिया ताकि लोगों के बीच पुलिस के साम्प्रदायिक चरित्र को उजागर किया जा सके।

प्रगतिशील लेखक संघ की किरन सिंह और उषा राय ने कहा कि इससे पहले भी माकपा के दफ्तर पर संघ के गुंडों ने हमला किया था और पुलिस मूक दर्शक बनी रही। उन्हांेने कहा कि रिहाई मंच के धरने पर पुलिसिया हमले को देश में व्याप्त फासीवादी गुंडागदी के विस्तार के रूप में देखा जाना चाहिए। जनवादी लेखक संघ के अजित प्रियदर्शी ने पुलिस दमन के खिलाफ सम्मेलन करने का प्रस्ताव रखा। एसआईओ के मोहम्मद साकिब ने कहा कि इससे पहले उनके संगठन के लोगों पर भी इसी स्थान पर धरना देते समय पुलिस की मौजूदगी में संघ परिवार के गुंडों ने हमला किया था और अखिलेश यादव की पुलिस ने दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के बजाए उल्टे संगठन के लोगों को ही सम्प्रदाय सूचक गालियां दी थीं।
आरटीआई कार्यकर्ता तनवीर अहमद सिद्दीकी और उर्वषी शर्मा ने भी हमले की निंदा करते हुए कहा इस सरकार में सरकारी भ्रष्टाचार की सूचना मांगने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओं तक को प्रशासन निशाना बना रहा है। पीयूसीएल के रामकुमार और आशीष अवस्थी ने इस घटना को निंदनीय बताते हुए सभी मानवाधिकार संगठनों को एक साथ आकर संघर्ष करने का आह्वान किया।

दलित मुस्लिम अधिकार मंच के प्रदेश अध्यक्ष शम्स तबरेज ने कहा कि राजीव यादव और शकील कुरैशी पर हमला सिर्फ दो व्यक्तियों पर हमला नहीं है। यह न्याय की इच्छा रखने वाले पूरे देशवासियों पर हमला है। दलित मुस्लिम अधिकार मंच के प्रदेश महासचिव सरफराज कमर अंसारी ने इस मुद्दे पर प्रदेश व्यापी यात्रा निकालने का सुझाव दिया।

 

 

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