Wednesday , August 23 2017
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रिहा हुआ इंतेजार, कहा पुलिस ने थाने में काफी अजियत दी

रांची : इंतेजार अली जमानत पर जुमा शाम छह बजे जेल से रिहा हुआ़ जेल के गेट से बाहर निकलते ही रिश्तेदार से गले मिला़। कहा बिना किसी जुर्म के 56 दिन जेल में कैसे बीता, बताना काफी मुश्किल है़। जिस वजह से मैं जेल से बाहर निकल पाया़। मुल्क का बदकिस्मती ही है कि बेगुनाह सख्श को 56 दिन जेल में रहना पड़ा़। उसने अपने साथ वाकेय हुयी वाकिया को बताया, कहा ट्रेन से गिरफ्तार करने के बाद मुझे सिल्ली थाना लाया गया़।

इसके बाद काफी तशद्दुद दी गयी़। दोनों पैर के बीच मेें डंडा बांध कर मुझे पीटा जाने लगा़। स्कूल की तरह डंडा से हाथ पर मारा जाता था़। पिटाई करनेवाले कहते थे कि ऐसा मारेंगे कि मेडिकल के दौरान डॉक्टर को कहीं भी चोट का निशान नहीं मिलेगा़। जब कोर्ट में पेश किया गया, तो जज ने पूछा कि क्या तुम्हारे साथ मारपीट की गयी़। हमने जज को बताया कि हमें काफी मुसीबतें दी गयी है़ं फिर जज ने मुझे वापस भेज दिया़।

ट्रेन में कैसे हुई गिरफ्तारी, इसका जिक्र करते हुए इंतेजार ने बताया मैं ट्रेन में सिंगल सीट पर बैठा था़ उसी वक़्त सादे लिबास में कुछ सख्श आये़ अचानक मेरा बैग चेक करने लगे़ मेरे बैग में आला व बीपी मापने की मशीन मिली़। मैं पुरुलिया से मेडिकल कैंप से लौट रहा था़। वे लोग मेरे बगल की चार सीट (चार सीटर) के पास गये और एक बैग खोला़ उसमें क्या था, मुझे पता नहीं। बैग को देखते ही सभी बोलने लगे, चलाे मिल गया़। इसके बाद मुझे कॉलर पकड़ कर एक मुल्क की गद्दार की तरह ट्रेन से किता स्टेशन पर उतार लिया गया़।

इंतेजार अली ने कहा अभी जमानत पर रिहा हुए है़ं। मुझे अदालत पर यकीन है़। इस केस बाइज्जत बरी होने के लिए आगे जितनी भी लंबी लड़ाई लड़नी पड़े, मैं तैयार हू़ं। जेल में बहुत से ऐसे कैदी हैं, जो 14 साल की सजा पूरी करने के बाद भी बंद है़। पर हुकूमत उन्हें रिहा नहीं कर रही है़। मैं हुकूमत से उन्हें रिहा करने की मांग करूंगा़। इंतेजार अली को लाने के लिए उसके बहनोई मुबारक हुसैन, मो निजामुद्दीन, मो अनवर हुसैन, भाई मो सरताज हुसैन, जेवीएम अक्लियत मोरचा के जिला सदर नदीम, मो तौहिद , मो माईन समेत मुहल्ले के कई लोग जेल पहुंचे थे़।

इंतेजार ने कहा पुलिस जिसे चाहे फंसा दे़। पुलिस अपने मुखबिर के कहने पर ही एक बेगुनाह को मुल्क का गद्दार बनाने पर तुल गयी थी़। लेकिन अखबारों का मैं जितना भी शुक्रिया अदा करूं कम है़ कुछ दिन के बाद ही छापा कि इंतेजार बेगुनाह है, तो उसे रिहा किया जाना चाहिए़। इसके बाद पुलिस भी सकते में आ गयी़। तहक़ीक़ात में भी धमाके खेज आलात से मेरा कोई ताल्लुक नहीं निकला़। घर से मिले डायरी, कंप्यूटर व मोबाइल में कोई सुबूत नहीं मिला़। फिर भी पुलिस किसी तरह हमें फंसाने की कोशिश करती रही़।

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