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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध शुरू, बोर्ड बंद करने की मांग

नई दिल्ली : मुस्लिम पर्सनल लो बोर्ड मुस्लिमों के फ्लाह के लिए तशकील की गयी थी। ये बात भी सच है की कुछ लोग बोर्ड को गलत दिशा में ले जा रहे हैं लेकिन क्या ये इस वजह से बोर्ड को ही बंद हो जाना चाहिए? एक वकील फराह फैज ने याचिका के जरिये सुप्रीम कोर्ट से बोर्ड को बंद करने की मांग कर डाली है। वकील ने कहा कि इसकी सोच रुढ़िवादी है। भारतीय मुस्लिमों को बचाने के लिए इस पर रोक लगनी चाहिए। हलफनामा में कहा, धर्म को देश से ऊपर देखा जाता है इस वकील का नाम फराह फैज है। मुस्लिमों के लिए अधिकारों के लिए लंबे से संर्घष कर रहीं फराह ने तीन तलाक का सबसे अधिक विरोध किया है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों के रुढ़िवादी फैसलों के कारण भारत में मुस्लिम धर्मसंकट में फंस जाता है। धर्म को देश से ऊपर कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए पर्सनल लॉ बोर्ड व शरिया कानून पर प्रतिबंध लगाए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि ऐसे संगठन कभी भी देश के बारे में उपदेश नहीं देते। वे लोगों के दिमाग में केवल धर्म से जुड़े नियम डालने की कोशिश करते हैं। फराह फैज ने सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में अपनी बात के पक्ष में दारूल उलूम देवबंद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे देश से कभी भी वित्तीय सहायता नहीं लेते मगर हजारों करोड़ रुपये दुनियाभर से लेते हैं। धर्म के नाम पर अलग से न्यायपालिका न हो याचिका में कहा गया कि धर्म के नाम पर अलग से न्याय व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। इस हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा गया कि ऐसे संगठन जबरन अपनी सोच थोपते हैं। वे समाज की वास्तविक सच्चाई और उदारवादी नजरिये की अवहेलना करते हैं। कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा गया कि संविधान सभी को बराबरी का हक देता है मगर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कारण मुस्लिम महिलाएं असुरक्षित जीवन जी रही हैं। पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था, सुप्रीम कोर्ट को दखल का अधिकार नहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हाल में सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मामले में हलफनामा दाखिल किया था। इसने कहा था कि पर्सनल लॉ को सामाजिक सुधार के नाम पर दोबारा नहीं लिखा जा सकता। बोर्ड ने अपने हलफनामे में तीन तलाक और चार शादी की व्यवस्था को सही ठहराया है। उसने कहा था कि तलाक की वैधता सुप्रीम कोर्ट तय नहीं कर सकता। बोर्ड ने कहा था कि बीवी से छुटकारा पाने के लिए शौहर उसका कत्ल कर दे, इससे बेहतर है कि उसे तीन बार तलाक कहने दिया जाए

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