Wednesday , September 20 2017
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रुस भी चला चीन की राह, पाक आतंकी गुटों पर चुप्पी

दिल्ली : अंग्रेज़ी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया’ में छपी खबर के मुताबिक चीन ने सम्मेलन के घोषणा-पत्र में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का नाम डालने का रास्ता बंद कर दिया था लेकिन रूस ने भी पाकिस्तान के इन दोनों आतंकवादी संगठनों को लेकर एक शब्द नहीं कहा। हैरानी की बात ये है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सूची में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा को आतंकवादी संगठन घोषित किया जा चुका है और ब्रिक्स के सदस्य देश इसका विरोध नही कर सकते इसके बावजूद रुस ने इस पर कोई स्टैंड नहीं लिया।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के एक दिन पहले भले ही रुस ने आत्मीयता दिखाते हुए भारत के साथ रक्षा सहित कई समझौतों पर दस्ख़त कर लिए हों लेकिन जब मामला आतंकी संगठनों को पाकिस्तान की शह का आया तो वह भी चीन की तरह कन्नी काट गया। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के बाद कहा था कि एक पुराना दोस्त नए दोस्तों से बेहतर है लेकिन रूस ने दोस्ती निभाने में दरियादिली नहीं दिखाई। उसने ब्रिक्स सम्मेलन में पाकिस्तान को आतंकवाद की वजह से अलग-थलग करने के मुद्दे पर भारत का समर्थन करने की बजाय मौन साधे रखा।

ग़ौरतलब है कि रूस के इस बदले रवैये की वजह उसके हाल ही में पाकिस्तान के साथ बढ़ी उसकी नजदीकियां बढ़ी हैं और हाल ही में उसने उसके साथ एंटी- टेरर एक्सरसाइज बताकर कई सैन्य अभ्यास किए हैं। पाकिस्तान ने हाल ही में कहा भी था कि अमेरिका के रवैये की वजह से वह रुस के पाले में जा सकता है।

एक तरफ जहां रूस ने जैश-ए-मोहम्मद का नाम गोवा घोषणा-पत्र में शामिल करने में भारत की मदद नहीं की वहीं उसने सीरिया के जमात-अल-नुसरा संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित करने का समर्थन किया। वजह साफ है, रुस सीरिया में अल-नुसरा को लगातार अपना निशाना बना रहा है। अल-नुसरा संगठन ने सीरिया में बशर-अल असद की सरकार को गिराने के लिए विद्रोह कर रखा है।

गोवा घोषणा-पत्र के आने से ठीक एक दिन पहले व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी को यह आश्वासन दिया था कि वे ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे भारत के हितों को नुकसान हो लेकिन विदेश मंत्रालय के सचिव अमर सिन्हा ने यह स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों को घोषणा-पत्र में शामिल करने को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई। इनका कहना था कि ये भारत और पाकिस्तान का आपसी मामला है।

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