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रू-ब-रू कार्यक्रम में जाहिद अली खान ने कहा : मुस्लिम समाज में बदलाव जरुरी है

हैदराबाद। उर्दू दैनिक सियासत के माइनॉरिटी डवलपमेंट फॉर्म (एमडीएफ) द्वारा आयोजित वैवाहिक मैत्री कार्यक्रम (रू-ब-रू) को संबोधित करते हुए जाहिद अली खान ने कहा कि यूपी चुनावों के परिणाम मुसलमानों के लिए एक बड़ी चुनौती है। अगर मुसलमान इस देश में सम्मान के साथ जीना चाहते हैं, तो उन्हें अपने बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त दिलाने पर ध्यान देना चाहिए। देश की वर्तमान स्थिति में मुस्लिम समाज के लिए सकारात्मक बदलाव अनिवार्य हैं।

समारोह की अध्यक्षता वाले इस कार्यकम का आयोजन रयान फ़ंक्शन पैलेस, मेहदीपट्टनम में हुआ। उन्होंने कहा कि शादियों में अधिक खर्च के कारण मुस्लिम समाज की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। एक अनुमान के मुताबिक मुसलमान हर साल शादियों पर 4000 करोड़ रुपये खर्च करते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि हिन्दू उनके घरों पर विवाह समारोह का जश्न मनाते हैं जबकि ईसाइ चर्चों में शादी का प्रबंध करते हैं। इसी तरह सिखों के विवाह में कोई अधिक खर्च नहीं लगता है। यह बहुत अफसोस की बात है है कि मुस्लिम शादी में अधिक खर्च कर मुसलमान इस्लामिक तालीम का उल्लंघन करते हैं। मुसलमानों के पास कोई योजना नहीं है और दहेज प्रणाली समाज को बर्बाद कर रही है।

उन्होंने सवाल किया कि यदि लड़कियों की माता-पिता पहली बेटी के विवाह पर अधिक पैसा खर्च करते हैं, तो वे अन्य बेटियों के विवाह के लिए पैसे कैसे जमा करेंगे? उन्होंने मुस्लिम माता-पिता को विवाह आसान बनाने और चरित्र को वरीयता देने की सलाह दी। उनका कहना था की सौंदर्य अस्थायी होता है जबकि अख़लाक़ स्थायी होता है। इस कार्यक्रम का आयोजन मुस्लिम माता-पिता को बच्चों की शादी को सरल तरीके से करने को लेकर किया गया।

अपने स्वागत भाषण में माइनॉरिटी डवलपमेंट फॉर्म के अध्यक्ष आबिद सिद्दीकी ने अफसोस जताया कि मुस्लिम माता-पिता विवाह में गैर इस्लामिक परंपराओं को अपना रहे हैं। उनकी करनी और कथनी में अंतर है। उन्होंने माता-पिता से उन लड़कियों का चयन करने की अपील की, जिनका अख़लाक़ अच्छा हो। इस अवसर पर ऑर्गनाइज़र के अध्यक्ष एम.ए.कदीर, मोहम्मद ताजुद्दीन, डॉ सैयद नाजीम अली, डॉ शेख सियादत अली और अन्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन उर्दू दैनिक सियासत के प्रबंध सम्पादक जहीरुद्दीन अली खान की देखरेख में विशेष रूप से इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए किया गया।

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