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रेलवे को जंक फूड के विज्ञापनों को अस्वीकार करने को कहा गया

स्वास्थ्य मंत्रालय का अनुरोध

भारतीय रेलवे अपने राजस्व में वृद्धि की योजना के तहत ट्रेनों और स्टेशनों को ब्रांड करने के बारे मे सोच रही है, वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रेल मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वे उन उत्पादों के विज्ञापनों की अनुमति न दें जिन से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हो।

हालांकि, रेलवे द्वारा उठाये जा रहे इस कदम का स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वागत किया परंतु उन्होंने रेलवे को चेतावनी भी दी की इस पहल का उपयोग व्यापारसंधो द्वारा शकर युक्त, गैस और बिना गैस के पेय पदार्थ , तम्बाकू, उच्च मात्रा में चरबी , चीनी और नमक (एचएफएसएस) युक्त खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है जिनसे स्वस्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं ।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, “ऐसे उत्पादों के विज्ञापनों के स्वास्थ्य पर और आर्थिक रूप से प्रतिकूल परिणाम होंगे … यह तम्बाकू और अस्वास्थ्यकर खाद्य उत्पादों के उपभोग को कम करने / नियंत्रित करने के लिए जारी किए जा रहे प्रयासों को भी बर्बाद करेगा।”

प्रमुख प्रभाव

इस पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि ऐसे उत्पादों के विज्ञापनों के कारण गैर-सांप्रदायिक रोग (जीवनशैली संबंधी बीमारियों) की समस्या भी बढ़ सकती हैं।

2013 में, सीवीडी, कैंसर, मधुमेह और जीर्ण श्वसन रोगों की वजह से 30-69 साल के आयु वर्ग में भारत में लगभग 31 लाख से अधिक मौते हुई हैं।

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