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रेल बजट की आज पेशकशी, किरायों में इज़ाफ़ा का इम्कान

रेलवे बजट कल पार्लीमेंट में पेश किया जाएगा, तवक़्क़ो है कि इस साल भी रेलवे बजट के ज़रीया मुसाफ़िर किरायों में कोई इज़ाफ़ा नहीं किया जाएगा। शरह बार बरदारी भी साबिक़ की तरह बरक़रार रहेगी अलबत्ता आला सतही ज़मरों के किरायों पर सेफ़्टी शरह

रेलवे बजट कल पार्लीमेंट में पेश किया जाएगा, तवक़्क़ो है कि इस साल भी रेलवे बजट के ज़रीया मुसाफ़िर किरायों में कोई इज़ाफ़ा नहीं किया जाएगा। शरह बार बरदारी भी साबिक़ की तरह बरक़रार रहेगी अलबत्ता आला सतही ज़मरों के किरायों पर सेफ़्टी शरहों में इज़ाफ़ा या इतलाक़ का इम्कान मुम्किन है।

तृणमूल कांग्रेस लीडर और वज़ीर रेलवे दिनेश त्रिवेदी कल ये बजट पेश करेंगे। ममता बनर्जी के बिशमोल उनके पेशरों की तरह वो द्वितीय श्रेणी (सेकेंड क्लास) के किरायों में इज़ाफ़ा नहीं करेंगे। एक दहिय के दौरान सेकेंड क्लास के किरायों में कोई इज़ाफ़ा नहीं किया गया है। बजट के ताल्लुक़ से ये क़ियास किया जा रहा है कि काकोडकर कमेटी रिपोर्ट की जानिब से पेश कर्दा सिफ़ारिशात पर अमल करते हुए सेफ़्टी सेस नाफ़िज़ किया जा सकता है।

ये सेफ़्टी सेस सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क पर हिफ़ाज़ती इक़दामात से मुताल्लिक़ मसाइल से मरबूत है। काकोडकर कमेटी ने सिफ़ारिश की थी कि 5 हज़ार करोड़ का फ़ंड जमा करने के लिए सेफ़्टी सेस नाफ़िज़ किया जाये। इस फ़ंड के ज़रीया सिगनल और तेली कम्यूनीकेशन निज़ाम को असरी बनाया जाएगा।

माहिरीन के मुताबिक़ अगर वज़ीर रेलवे दिनेश त्रिवेदी रेल किराये में इज़ाफ़ा से गुरेज़ करते हैं तो इस मुल्क के सबसे बड़े रेल सिस्टम की सिक्योरिटी कोताहियों को दूर नहीं किया जा सकता जबकि वज़ारत रेलवे ग्रुप सी और ग्रुप डी में तकरीबन देढ़ लाख नए तक़र्रुत के ख़ाहां है। बताया जाता है कि रेलवे की फ़ाज़िल आमदनी में गुज़श्ता चार साल के दौरान नुमायां कमी हुई है और रेलवे ने हुकूमत से जारीया मालियती साल 40,000 करोड़ रुपय की मदद तलब की थी ।

अगर मौजूदा सूरत-ए-हाल बरक़रार रखते हुए आमदनी में इज़ाफ़ा ना किया जाये तो इस तलब में भी ग़ैरमामूली इज़ाफ़ा का अंदेशा है। माहिरीन का कहना है कि रेलवे किराये में इज़ाफ़ा दिनेश त्रिवेदी के लिए नागुज़ीर है। इससे पहले दो कमेटियों अनील और साम पटरोडा ने किराये में इज़ाफ़ा की सिफ़ारिश की थी।

इसके साथ साथ इन दो कमेटियों ने रेलवे ट्रैक सिस्टम को ज़्यादा बेहतर बनाने और सिर्फ हिफ़ाज़ती पहलूओं पर तवज्जा देने पर ज़ोर दिया था ।

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