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रोहिंग्या मुसलमानों का संकट हुआ गंभीर, सूकी ने अपना दूत बांग्लादेश भेजा

रंगून। म्यांमार की नेता आंग सांग सूकी में उच्चस्तरीय बातचीत के लिए अपना दूत कल बांग्लादेश भेज रही हैं क्योंकि संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि रोहिंग्या मुसलमानों पर अत्याचार बढ़ने की वजह से पिछले तीन महीनों में 65 हजार लोगों ने म्यांमार से भागकर बांग्लादेश में शरण लिया है।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार नोबेल पुरस्कार विजेता सूकी की 9 महीने पुरानी प्रशासन के सामने यह सबसे बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए वह उप विदेश मंत्री को तीन दिवसीय यात्रा पर ढाका भेज रही हैं।शरणार्थी की नई लहर और म्यांमार की नौसेना की ओर से एक बांग्लादेशी विशेषज्ञ को गोली मारने की खबर ने दोनों पड़ोसियों के बीच हमेशा कड़वे रहे संबंधों को बिगाड़ दिया है। ये दोनों ही देश रोहिंग्या मुसलमानों को एक दूसरे की समस्या बताते हैं।

म्यांमार अपने पश्चिमी पड़ोसी के साथ सहयोग से कतरा रहा है मगर इस बार उसका रवैया अलग है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस संकट के समाधान के लिए यह जरूरी है। कि रोहिंग्या विद्रोहियों ने 9 अक्टूबर को म्यांमार की सीमा के चौकियों पर धावा बोलकर 9 पुलिस वालों को मार डाला था। इसके जवाब में म्यांमार ने राखेन राज्य के उत्तरी भाग में सेना भेज दी थी। वहाँ के निवासियों और शरणार्थियों का कहना है कि सेना की कार्रवाई में लोगों को अवैध तरीके से मौत के घाट उतारा गया है। मनमाने ढंग से लोगों को गिरफ्तार किया गया है और महिलाओं की आबरू लूटी गई है। जबकि सूकी की सरकार सभी अत्याचारों और आरोपों को गलत बता रही है।

उन्होंने सरकार की इस महत्वाकांक्षी नीति का हवाला दिया कि स्वदेश वापसी की बातचीत बांग्लादेश में स्थित केवल उन 2415 लोगों के लिए होगी जिन्हें म्यांमार अपना नागरिक मानता है। उन्होंने कहा कि ” हमें यह पुष्टि करनी होगी कि कितने लोग वहां आए हैं। वे कहाँ से आए हैं लेकिन उनकी सही पुष्टि करना मुश्किल है।” गौरतलब है कि म्यांमार रोहिंग्या मुसलमानों को सिरे से अपना नागरिक ही स्वीकार नहीं करता और न ही उन्हें अधिकार देता है। उन्हें कई राज्यों द्वारा हिंसा का निशाना बनाया जा रहा है।

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