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रोहिथ वेमुला की माँ को दलित होने की कीमत चुकानी पड़ी

करीब एक महीना हो चुका है स्टूडेंट्स और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स रोहिथ वेमुला के लिये इन्साफ की मांग कर रहे है रोहिथ वेमुला ,एक दलित स्टूडेंट जिसको हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एडमिनिस्ट्रेशन ने इतनी बेज्ज़ती की जिससे दुखी होके दलित स्टूडेंट ने 17 दिसंबर 2015 को खुद ख़ुशी कर ली .

भारत की वज़ीरे खारजा सुषमा स्वराज ने तो मामले में नया मोड़ देने की कोशिश में रोहिथ को गैरदलित तक बता दिया था मामले की ईमानदार जाँच के बजाय जाँच एजेंसीज ने अवाम के पैसे और मेहनत को रोहिथ के दलित होने ये गैर दलित होने की जाँच में लगाया

मामले को इमानदारी से खातून के नजरिये से देखा जाना चाहिये.

रोहिथ ही खाली मामले में पीड़ित नही है बल्कि जातिवादी समाज के तहत काफी लोग जद में रहते है .उसकी वालिदा राधिका वेमुला जोकि दूसरी भारतीय ख्वातीन की तरह समाज के मर्दाना ज़हनियत की शिकार अपने बचपन से रही है

राधिका ऐसे दलित परिवार में पैदा होती है जो माला जाति का है और दिहाड़ी मजदूरी का काम करता है उसको गुंटूर की अंजनी गोद ले लेती है अंजनी वेडडेरा समुदाय की है .अंजनी का पारिवार तालीम याफ्ता होता है इसके बावुजूद राधिका को सहुलियते नही मिलती है जो जैविक औलादों को मिलती है .राधिका को घरेलु नौकर की तरह परिवार में रहना पड़ता है और तालीम भी सही से नही मिल पाती है .

14 साल की होने पे उसकी वेडडर समुदाय के वेमुला मणि कुमार से बाल विवाह हो जाता है .वेमुला मणि कुमार के पारिवार को राधिका का दलित होने का पता नही रहता है शादी के कुछ दिन बाद राधिका के पति को किसी के द्वारा जानकारी मिल जाती है कि राधिका वेडडेरा नही बल्कि माला जाति की दलित है .

उसके बाद राधिका का शौहर राधिका के साथ बुरा सुलूक करना शुरू कर देता है आखिरकार उनका शौहर 1990 में दलित होने की वजह से राधिका को तलाक दे देता है . अब वो रोहिथ और दो बच्चो के साथ गुंटूर इलाके के प्रकाश नगर किराये के एक कमरे वाले मकान में रहती है सिलाई करके अपने बच्चो को ज़िन्दगी आसान बनाने की कोशिश करती है जहाँ वो रहती है वहां पे 40 दलित परिवार और भी रहते है जिनकी माली हालत राधिका जैसी थी .

तलाक़ के बाद भी राधिका का शौहर प्रकाशनगर के किराये के मकान में आके राधिका को धमकता था लेकिन पडोसीयो की मदद से राधिका बच जाती थी .दो दशक के बाद राधिका सवित्रीनगर के नल्लापडू इलाक़े में दो साल पहले अपनी रिहाइश बनाती है .

ये बहुत जायदा तकलीफ देह है और दिल तोड़ने जैसा है कि राधिका हाई ब्लड प्रेशर और सीने के दर्द की मरीज़ है उसके दलित होने को जांचा गया .
अभी भी समाज के असरवाले लोग बच्चो को वालिद की जाति का बताने पे उतारू थे जिसने खुद अपनी बीबी और बच्चो को दलित होने पे अपने से अलग कर दिया .

मर्दाना समाज की जहनियत जो हमेशा ख्वातीनो का दमन करता है को ख़त्म करने का वक़्त है और समाज के जागने का वक़्त है

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