Saturday , October 21 2017
Home / Khaas Khabar / रोहिनगया मुसलमानों की हिफाजत पर संयुक्त राष्ट्र (UN) का ज़ोर

रोहिनगया मुसलमानों की हिफाजत पर संयुक्त राष्ट्र (UN) का ज़ोर

न्यूयार्क, ०३ नवंबर (राइटर्स) अक़वाम-ए-मुत्तहिदा (UN) के माहिरीन (Expert) इंसानी हुक़ूक़ (मानवाधिकार) ने मयनमार से मुतालिबा किया है कि रोहिनगया (Rohingya) मुसलमानों का बुद्धिस्ट अक्सरीयत से तहफ़्फ़ुज़ (हिफाजत) किया जाए, जिन के साथ अर्सा से रोहिनग

न्यूयार्क, ०३ नवंबर (राइटर्स) अक़वाम-ए-मुत्तहिदा (UN) के माहिरीन (Expert) इंसानी हुक़ूक़ (मानवाधिकार) ने मयनमार से मुतालिबा किया है कि रोहिनगया (Rohingya) मुसलमानों का बुद्धिस्ट अक्सरीयत से तहफ़्फ़ुज़ (हिफाजत) किया जाए, जिन के साथ अर्सा से रोहिनगया मुसलमानों का नसली तसादुम (लड़ाई) जारी है।

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के माहिरीन ने हुकूमत मयनमार को मुल्क की अक़लियत‌ (अल्पसंख्यको) के ख़िलाफ़ ताक़त के इस्तेमाल के बारे में इंतिबाह ( चेतावनी) दिया है। मयनमार में रोहिनगया मुसलमान अक़ल्लीयत में हैं और बैन-उल-अक़वामी अक़ल्लीयती हुक़ूक़ के मयारों के मुताबिक़ इनका तहफ़्फ़ुज़ (बचाव) मुल्क की हुकूमत की ज़िम्मेदारी है।

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की आज़ाद माहिर बराए अक़ल्लीयती मसाइल रीटा अज़साक ने राइटर्स से कहा कि हुकूमत को मुताल्लिक़ा क़वानीन (नियम व कानून) और तरीका-ए-कार पर नज़रसानी (पुन:विचार) के इक़दामात (कार्यनिष्पादन) करने चाहीए,ताकि रोहनगया तबक़ा को भी शहरीयत तक मुसावी रसाई (पहुंच)हासिल हो सके।

दोनों तबकों के दरमयान बातचीत और समझौते की हुकूमत को हौसलाअफ़्ज़ाई करनी चाहीए। अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के माहिरीन ने हुकूमत मयनमार को रोहनगया मुसलमानों को मुल्क से ख़ारिज करने (निकालने) के लिए तशद्दुद में हालिया इज़ाफ़ा को बहाना बनाने के ख़िलाफ़ ख़बरदार किया और कहा कि इस सूरत-ए-हाल को मुस्तक़िल तौर पर बरक़रार नहीं रहना चाहीए।

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के ख़ुसूसी नुमाइंदा बराए मयनमार टॉम्स ओजया कोइंटाना ने कहा कि मयनमार में मुसलमानों को नागवार तबक़ा नहीं समझा जाना चाहीए। रोहिनगया मुसलमानों को गै़रक़ानूनी तारकीन-ए-वतन और बे मुल्क अफ़राद क़रार देने के हुकूमत के बयान पर सख़्त तशवीश(चिंता) ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि अगर मयनमार जमहूरी (सार्वजनिक) तबदीली लाने में कामयाब होना चाहता है तो उसे इंसानी हुक़ूक़ को दरपेश चैलेंज्स की यकसूई करना होगी।

रियासत राखीन के बारे में उन्होंने कहा कि यहां रोहिनगया तबक़ा से तवील मुद्दती तास्सुब (अनुचित पक्षपात/ धार्मिक पक्षपात) बरता जा रहा है, जिस में मुक़ामी और क़ौमी हुकूमतों के इलावा बड़ी हद तक मुआशरा भी मुलव्वस है। उन्हें शहरीयत से भी महरूम रखा गया है, वो अपने वतन में ही बे वतन हो गए हैं।

TOPPOPULARRECENT