Wednesday , October 18 2017
Home / India / रोज़े मेरे चल रहे हैं इन बेज़ुबान जानवरों के तो नहीं..

रोज़े मेरे चल रहे हैं इन बेज़ुबान जानवरों के तो नहीं..

जहाँ देश भर में बीफ बैन और गौ तस्करी को लेकर कोई न कोई बवाल मचा ही रहता है वहीँ कुछ लोग ऐसे हैं कि अपने कर्मों से दुनिया भर को चौंका कर रख देते हैं। अक्सर बीफ बैन और गौ तस्करी का मामला देश भर में रहने वाले मुसलामानों के साथ जोड़ दिया जाता है लेकिन जैसलमेर के रहने वाले हाजी मेहरदीन ने साम्प्रदायिक सौहार्द की एक बेमिसाल उदारहण दी है।

हम सब जानते हैं कि रमजान का पवित्र महीना चल रहा है जिसमें मुसलमान रोजे रखकर भूखे प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत करते हैं। वहीँ एकता की मिसाल पेश कर रहे हाजी जैसलमेर में रोजों के दौरान भूखे प्यासे रह कर गायों के लिए रोटियां मांगते हैं और सच्चे ईमान के साथ गाय की सेवा करके अपना दिन बिताते हैं। आपको बता दें कि वह ये काम पिछले 15 सालों से करते आ रहे हैं। रमजान का पवित्र महीना एक सच्चे मुसलमान के लिए इबादतों वाला होता है। जिसमें वह भूखे प्यासे रहकर खुदा की राह में त्याग करने की मिसाल पेश करता है।

जैसलमेर की गलियों में लोगों की सुबह की पहली किरण के साथ हाजी का इंतजार रहता है। हाजी का कहना है कि वह रमजान के महीने में भी बखूबी अपना काम करते है क्यूंकि रोजा उन्होंने रखा है लेकिन गायों ने तो नहीं। उन्हें गायों की सेवा करके बहुत सुकून मिलता है और जैसे भी हालात हो वह अपने काम को अंजाम देते हैं। मुस्लिम होते हुए भी उनका गायों के लिए प्यार और शिद्दत गजब की है। अपनी रिक्शा में आते हाजी लोगों से रोटियां इकट्ठी करके अपने हाथों से गायों को खिलाते हैं। कमाल की बात ये है कि देश की ऐसे हालातों में जहाँ गायों के नाम पर नेता धर्म को लेकर राजनीति कर रहे हैं वहीँ हाजी जैसे लोग सेवा को ही अपना कर्म मानते हैं। हाजी कहते है कि इस्लाम शान्ति एकता और भाईचारे का सन्देश देता है। हाजी के बारे वहां के लोगों का कहना है कि रोजों में भी 15 से 20 किलोमीटर चलने वाले हाजी भीषण गर्मी में गायों के लिए रोटी इकट्ठी करके बहुत ही बड़ा काम कर रहे हैं, आज के वक़्त में ऐसे लोगों की बहुत जरूरत है।

TOPPOPULARRECENT