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लक्कड़ी का पुल : ट्राफिक जाम से छुटकारा कब मिलेगा ?

नुमाइंदा ख़ुसूसी --लक्कड़ी का पुल ये नाम सुनते ही , हर गाड़ी सवार के ज़हन में बहुत सारे सवालात और उलझनें गर्दिश करने लगते हैं । लक्कड़ी का पुल जहां ट्राफिक का इतना अज़धाम(भीड) रहता है कि इस के तसव्वुर से ही ज़हन परेशान हो जाता है । लक

नुमाइंदा ख़ुसूसी –लक्कड़ी का पुल ये नाम सुनते ही , हर गाड़ी सवार के ज़हन में बहुत सारे सवालात और उलझनें गर्दिश करने लगते हैं । लक्कड़ी का पुल जहां ट्राफिक का इतना अज़धाम(भीड) रहता है कि इस के तसव्वुर से ही ज़हन परेशान हो जाता है । लक्कड़ी का पुल आते ही हर कोई ये फैसला कर लेता है कि इस भीड़ से निकलना और छुटकारा पाना कोई आसान काम नहीं । और जैसे ही कोई यहां की भीड़ से मुश्किल से निकलता है तो बड़ी राहत और सुकून महसूस करता है । जैसे उस ने किसी बड़े निशाना को पार करलिया हो । इन तमाम मसाइल और मुश्किलात की बिना पर एक लंबे अर्सा से इस पुल के मुत्तसिल (बाजू) एक मुतवाज़ी (ठीक उसके बाजू) पुल की ज़रूरत का शिद्दत से एहसास किया जा रहा था ।

चुनांचे मई 2011 को जब चीफ मिनिस्टर जनाब किरण कुमार रेड्डी ने 100 दिन मिशन प्रोग्राम के दौरान मौजूदा पुल से मुत्तसिल (बाजू) एक और मुतवाज़ी (ठीक उसके बाजू) पुल की तामीर की मंज़ूरी दी तो इस ऐलान से अवाम में बड़ी ख़ुशी का माहौल देखा गया था । अवाम का ख़्याल था कि अब उन की रोज़ रोज़ की परेशानी हल हो जाएगी और अब वो इस फ़ासिला को बहुत कम वक़्त में आसानी के साथ तै कर सकें गे ।

वाज़ेह रहे कि लक्कड़ी का पुल चौराहे पर ट्राफिक के संगीन मसला की मुस्तक़िल यकसूई (हल) के लिए ग्रेटर हैदराबाद म़्यूनिसिपल कारपोरेशन , ट्राफिक पुलिस और साउथ सैंटर्ल रेलवे के इश्तिराक(साझा) से ये मंसूबा बनाया गया था इस चौराहे की तजदीद(मोडिफाइ) कारी के इलावा वहां पर मौजूदा पुल से मुत्तसिल (बाजू) एक मुतवाज़ी (ठीक उसके बाजू) पुल की तामीर के लिए तमाम काग़ज़ी कार्यवायां मुकम्मल करली गई थीं और रियासती हुकूमत ने इस पुल की तामीरके लिए 9 करोड़ रुपये फंड्स साउथ सैंटर्ल रेलवे को फ़राहम भी कर दीए थे नीज़ इस पुल का डिज़ाइन साउथ सैंटर्ल रेलवे के इंजीनीयरों ने तय्यार किया था और इस मुतवाज़ी (ठीक उसके बाजू) पुल की तामीर के लिए बलदिया की जानिब से 1600 मुरब्बा गज़ अराज़ी (जमीन) हासिल करली गई थी ।

मज़ीद एक जायदाद के हुसूल में नागुज़ीर वजूहात की बिना पर हुनूज़ (अभी भी) ताख़ीर हो रही थी । इस मौक़ा पर एडीशनल कमिशनर डेवलपमनट प्लानिंग ग्रेटर हैदराबाद म़्यूनिसिपल कारपोरेशन मिस्टर के धनंजय रेड्डी ने बताया था कि ये पुल 11 मीटर चौड़ा और 126 मीटर तवील (लमबा)होगा । जिस के साढे़ छः मीटर नीचे रेलवे ट्रैक होगी । नीज़ उन्हों ने कहा था कि 6 माह के अंदर इस प्रोजेक्ट की तकमील अमल में आएगी । लेकिन ये मई 2012 चल रहा है और अभी कहीं से कहीं तक करीबी ज़माने में भी इस मंसूबा की तकमील के इमकानात नहीं है ।

काम का आग़ाज़ (शरुवात) ज़रूर होचुका है लेकिन बिलकुल कछुवे की चाल है ।नीज़ वक़फ़ा वक़फ़ा से काम बंद भी हो जाता है । जिस की सब से अहम वजह ज़िम्मेदार और मुताल्लिक़ा मह्कमाजात जैसे एस सी आर , जी एच एम सी , एच एम डब्ल्यू एस एस बी , सी पी डी सी एल , ए पी ट्रांस्को , आर एंड बी , एन एच ए आई , ट्राफिक पुलिस , एच एम डी ए , और ए पी एस आर टी सी के दरमियान ताल मेल का फ़ुक़दान(कमी) समझा जा रहा है । जैसे हुकूमत और अवाम के माबेन कोई ताल मेल नहीं है । उसे तमाम मंसूबे और वाअदे जिन का या तो आग़ाज़ (शरुवात) ही नहीं हुवा ।

या किसी वजह से वो मुक़र्ररा वक़्त पर तकमील तक नहीं पहुंच सके । सहाफ़त अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए उन्हें मंज़रे आम पर लाता रहता है । जिस की वजह से अवाम में हुकूमत के बारे मे बहुत मायूसी और बदज़नी पाई जाती है । और अब हाल ये होगया है कि अवाम हुकूमत के वादों को ना संजीदगी से लेती है और ना उन पर एतिमाद करती है जिस से हुकूमत को ख़ुद अंदाज़ा होगया है कि लाख कोशिश के बावजूद अब अवाम बरसर-ए-इक्तदार हुकूमत ने अपने वादों को ऐलानात तक ही महिदूद करलिया है इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती या की जाती है तो बहुत सुस्त रफ़्तार जैसे लक्कड़ी का पुल का मंसूबा है ।

ये एक अहम चौराहा है जो शहर के अहम इलाक़ों को जोड़ता है जहां से रोज़ाना लाखों गाड़ियों का गुज़र होता है यहां का ट्राफिक अज़धाम(भीड) अवाम के लिए दर्द-ए-सर बन कर रह गया है । और हुकूमत है कि इस के लिए संजीदा नहीं दिखाई देती । लेकिन 4 मई को ना मुकम्मल तमाम प्रोजेक्ट की तकमील में हो रही ताख़ीर का जायज़ा लेने के लिए एक इजलास तलब किया गया था जिस में कमिशनर बलदिया के इलावा दीगर उहदेदारान भी मौजूद थे ।अब देखना ये है कि जिन लोगों की वजह से मंसूबा की तकमील में ग़ैरमामूली ताख़ीर हो रही है उन के ताल्लुक़ से किया कार्रवाई की जाती है ।

* लक्कड़ी का पुल जहां ट्राफिक जाम हर वक़त का मामूल है । इस संगीन मसला की यकसूई (हल) के लिए रियासती हुकूमत ने इस से मुत्तसिल (बाजू) एक मुतवाज़ी (ठीक उसके बाजू) पुल की तामीर की मई 2011 में मंज़ूरी दी थी । अंदरून 6 माह जिस की तकमील का तीक़न दिया गया था । लेकिन हुनूज़ (अभी भी) मंसूबा मुकम्मल ना होसका ।।

* पुल की तामीर के लिए 9 करोड़ रुपये भी साउथ सैंटर्ल रेलवे को फ़राहम किए जा चुके हैं लेकिन काम में ग़ैर मामूली सुस्ती और ताख़ीर पाई जा रही है ।।

* ना मुकम्मल तमाम मंसूबों की तकमील में हो रही ताख़ीर का जायज़ा लेने के लिए 4 मई को इजलास तलब किया गया था जिस में कमिशनर बलदिया और दीगर उहदेदारान शरीक थे ताहम (फिर भी) काम की रफ़्तार में कोई तेज़ी नहीं देखी जा रही है ।।

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