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लखनऊ का प्रतीकात्मक टुंडे कबाबी योगी के रोकथाम का शिकार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आमतौर पर दोपहर एक बजे चौक क्षेत्र में भीड़ रहती है जहां ज़ायदाज़ 100 साल पुराने दुकान ”टुंडे कबाबी ” कारोबार करते है योगी आदित्यनाथ की तरफ से ल‌गाई गई पाबंदी का शिकार हो गए है। आज जब इस जगह का नज़ारा देखने में आया तब उसके लगभग 20 टेबलों में से 15 खाली दिखाई दिए।

लखनऊ में खाने के प्रसिद्ध स्थानों में काफी इस वर्ग में ‘टुंडे कबाबी’ का व्यापार अवैध मांस दोकानात पर नई भाजपा सरकार के निषेध का बहुत बुरा असर पड़ा है। अकबरी गेट पर स्थित यह व्यापार जो 1905 से चला आ रहा था, बुधवार को राज्य की राजधानी में भैंस के मांस की कमी के कारण बंद करना पड़ा।

2013 और 2015 के बीच उन 4 दुकान‌ बंद किए जा चुके हैं। गुरुवार को टुंडे कबाबी ने कारोबार शुरू किया लेकिन मेनू में प्रसिद्ध स्वाद का ” बड़े का कबाब ” शामिल नहीं रखा गया। इस की स्थापना के बाद से पहली बार चिकन और मटन कबाब प्रमुख किए गए। अकबरी गेट शाखा चलाने वाले अबूबकर ने कहा कि ग्राहक गुस्सा हो रहे हैं।

मुझे भी महंगा पड़ रहा है और हमारी सुविधा खत्म हो गई है। दुकान के अंदर हर दीवार पर नए स्टेकरस पेस्ट कर दिए गए जहाँ लिखा है कि चिकन और मटन कबाब उपलब्ध है चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ समीक्षा के बाद से भाजपा के चुनावी वादों के पूरा होने में जुट गए और अवैध मसालख पर प्रतिबंध नई सरकार इस प्रक्रिया का हिस्सा है।

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