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लफ़्ज़ सेकुलरिज्म का सबसे ज़्यादा बेजा इस्तेमाल:राज नाथ सिंह

नई दिल्ली 27 नवंबर: लोक सभा के सरमाई मीटिंग का दस्तूरे हिंद पर मबाहिस के साथ आग़ाज़ हुआ। मबाहिस के दौरान हुकूमत ने कहा कि लफ़्फ़ाज़ सेकुलरिज्म का दस्तूर में बेजा इस्तेमाल किया गया है इस का बे-जा इस्तेमाल हुआ है जबकि अप्पोज़ीशन जमातों ने कांग्रेस सदर सोनीया गांधी की क़ियादत में अदम रवादारी का मसला उठाया।

दस्तूरे हिंद के मुअम्मार डॉ बी आर अंबेडकर के 125 वें यौमे पैदाइश के मौके पर दस्तूरे हिंद पर मबाहिस का आग़ाज़ करते हुए वज़ीर-ए-दाख़िला राज नाथ सिंह ने कहा कि दस्तूर के मुअम्मार ने इस दस्तावेज़ में लफ़्ज़ सेकुलरिज्म को शामिल करने के बारे में सोचा भी नहीं था।

उन्होंने कहा कि इस लफ़्ज़ को 1976 में एक तरमीम के ज़रीये शामिल किया गया है। राज नाथ सिंह ने कांग्रेस की तरफ से एहतेजाज के दौरान कहा कि अलफ़ाज़ सोशलिस्ट और सेक्युलर को दस्तूरे हिंद में दस्तूर की 42 वीं तरमीम के ज़रीये शामिल किया गया है। इस पर हुकूमत को कोई एतेराज़ भी नहीं है। जो हो चुका हो चुका है।

राज नाथ सिंह ने हिन्दी लफ़्ज़ धर्मनिरपेक्षता के इस्तेमाल की भी मुख़ालिफ़त की उर कहा कि सेकुलरिज्म का तर्जुमा पंत निरपेक्षता होना चाहीए। उन्होंने कहा कि यही उस का सरकारी हिन्दी तर्जुमा है और यही लफ़्ज़ इस्तेमाल किया जाना चाहीए।

उन्होंने कहा के लफ़्ज़ सेकुलरिज्म के ग़लत इस्तेमाल की वजह से मुल्क में समाजी हम-आहंगी को बरक़रार रखना मुश्किल होता जा रहा है । सोनीया गांधी ने इस के जवाब में अदम रवादारी के मसले पर हुकूमत को तन्क़ीद का निशाना बनाया। वज़ीरे दाख़िला ने तहफ़्फुज़ात के मसले पर भी इज़हार-ए-ख़याल किया। उन्होंने कहा कि तहफ़्फुज़ात के मसले को भी सियासी रंग देदिया गया है।

वज़ीरे दाख़िला ने वाज़िह किया कि कोटा एक दस्तूरी गुंजाइश है और इस पर किसी मबाहिस की मज़ीद कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने ये वज़ाहत इसवक़्त की जबकि बिहार असेंबली चुनाव की मुहिम के दौरान आर एस एस सरबराह मोहन भागवत ने तहफ़्फुज़ात के निज़ाम पर नज़रसानी की ज़रूरत पर-ज़ोर दिया था।

उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान वो वाहिद मुल्क है जहां मुसलमानों के तमाम 72 फ़िरक़े रहते हैं और मजूसी और यहूदी तबक़ात भी दुनिया-भर में मसाइल का शिकार होने के बावजूद यहां ख़ुद को महफ़ूज़ तसव्वर करते हैं। डॉ अंबेडकर को ख़राज पेश करने के अलावा क़ौम की तामीर में उन्होंने साबिक़ वज़ीर-ए-आज़म पण्डित जवाहर लाल नेहरू और साबिक़ वज़ीरे दाख़िला सरदार पटेल के रोल का भी तज़किरा किया।

उन्होंने कहा के नरेंद्र मोदी अंबेडकर और दस्तूर के फ़लसफ़ा से मुतास्सिर हैं इसी लिए उन्होंने स्वच्छ भारत और बेटी पढ़ाओ। बेटी बचाओ जैसे प्रोग्राम शुरू किए हैं। उन्होंने कहा के मर्कज़ी हुकूमत ख़वातीन को नियम फ़ौजी दस्तों और रियासती पुलिस फोर्सेस में 33 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने इक़दामात कर रही है तो कांग्रेस के एक रुकन ने सवाल किया कि मोदी हुकूमत ख़वातीन को लोक सभा और रियासती असेंबलीयों में 33 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने दस्तूरी तरमीमी बिल पेश करने में क्युं ताख़ीर कर रही है।

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