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लापरवाही और अवामी शिकायत में वक़्फ़ बोर्ड अव्वल

महकमा अक़लीयती बहबूद की कारकर्दगी के बारे में अगर्चे अवामी सतह पर कई शिकायात हैं लेकिन इन में वक़्फ़ बोर्ड ने दीगर इदारों पर सबक़त हासिल करली है। आम तौर पर चीफ़ मिनिस्टर की जानिब से किए गए किसी भी फ़ैसला पर अमल आवरी मुताल्लिक़ा इदार

महकमा अक़लीयती बहबूद की कारकर्दगी के बारे में अगर्चे अवामी सतह पर कई शिकायात हैं लेकिन इन में वक़्फ़ बोर्ड ने दीगर इदारों पर सबक़त हासिल करली है। आम तौर पर चीफ़ मिनिस्टर की जानिब से किए गए किसी भी फ़ैसला पर अमल आवरी मुताल्लिक़ा इदारा की अव्वलीन ज़िम्मेदारी होती है लेकिन रमज़ानुल मुबारक में तेलंगाना में मसाजिद और ईदगाहों की तामीर और मुरम्मत, आहक पाशी और दीगर ज़रूरी कामों के सिलसिले में हुकूमत की जानिब से एलान कर्दा रक़म आज तक वक़्फ़ बोर्ड ने जारी नहीं की।

अब जबकि रमज़ानुल मुबारक का मुक़द्दस महीना गुज़र चुका है और मुसलमानों ने ईदुल फ़ित्र भी मना ली लिहाज़ा अब इस रक़म की इजराई बेमानी होकर रह जाएगी। दिलचस्प बात ये है कि चीफ़ मिनिस्टर चन्द्र शेखर राव ने 16 जून को रमज़ानुल मुबारक के इंतेज़ामात के सिलसिला में मुनाक़िदा इजलास में 5 करोड़ रुपये की इजराई का एलान किया था और इस सिलसिले में वक़्फ़ बोर्ड में मौजूद फ़ंड की इजराई का फ़ैसला किया गया।

वक़्फ़ बोर्ड को रक़म की इजराई के सिलसिले में हिदायत दी गई लेकिन नामालूम वजूहात की बिना पर बोर्ड ने आज तक रक़म मुताल्लिक़ा कलेक्टर्स को जारी नहीं की। अब जबकि रक़म की अदम इजराई के सिलसिले में आला ओहदेदार वक़्फ़ बोर्ड के ज़िम्मेदारों से बाज़पुर्स कर रहे हैं तो वो मुख़्तलिफ़ बहाने तलाश कर रहे हैं जिन में बाअज़ तकनीकी दुशवारीयों का हवाला दिया जा रहा है।

बोर्ड के एक ओहदेदार ने कहा कि 5 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं और आइन्दा चंद दिन में वो ज़िला कलेक्टर्स के अकाउंट में पहुंच जाएंगे लेकिन सवाल ये पैदा होता है कि रमज़ानुल मुबारक के इख़तेताम के बाद इस रक़म की इजराई से किया फ़ायदा। ज़िला कलेक्टर्स भी अब ये रक़म जारी करने के मौक़िफ़ में नहीं होंगे क्योंकि जिस मक़सद के लिए जारी किया गया था वो मरहला तो गुज़र गया।

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