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लालू के साले ने थामा पप्पू का हाथ

पटना : कभी लालू प्रसाद के एक जोड़ा साले ( टीवी प्रोग्राम में ये बात लालू प्रसाद यादव ने कहा था) उनके बांय – दांये हुआ करते थे। हुकुमत जाने पर एक तो पहले ही साथ छोड़ चले गए थे, बचे दूसरे साले ने भी पीर को साथ छोड़ दिया। दूसरे साले ने साथ छोड़कर लालू के बुनियाद परस्त मुखालिफ़ पप्पू यादव के साथ चले गए। ये अब पप्पू के साथ मिलकर लालू पर हमला करेंगे।
सुभाष यादव बिहार की साबिक़ वजीरे आला राबड़ी देवी के भाई और आरजेडी सरबराह लालू प्रसाद यादव के छोटे साले हैं। राष्ट्रीय जनता दल के हुकूमत से हटने के बाद सियासी तौर से गुमनामी का दंश झेल रहे सुभाष यादव अपने हामियों के साथ अज़ीम इत्तिहाद के मुखालिफ पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी में पीर को शामिल हो गए।

मिलन तकरीब में लालू यादव के साले सुभाष यादव ने कहा कि अगर पप्पू यादव कहते हैं तो वे राजद के खिलाफ महुआ और राघोपुर में भी इंतिख़ाब तशहीर कर सकते हैं। गौरतलब है कि महुआ से लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और राघोपुर से छोटे बेटे तेजस्वी यादव इंतिख़ाब लड़ रहे हैं। ये दोनों सीट लालू के लिए सबसे अहम मानी जा रही है।

सुभाष यादव लालू यादव की पार्टी आरजेडी के साबिक़ एमपी हैं। जिस वक़्त बिहार में लालू यादव और राबड़ी देवी की हुकूमत थी उस वक़्त लालू के दोनों सालों साधु यादव और सुभाष यादव की तूती बोलती थी। लालू की पार्टी के हुकूमत से बाहर होने के बाद सुभाष यादव गुमनामी की ज़िंदगी जी रहे थे। सुभाष यादव आरजेडी में एक नई किरदार चाहते थे, लेकिन लालू यादव और राबड़ी देवी को ये मंजूर नहीं था। सुभाष यादव अपनी बीवी के लिए भी आरजेडी में सियासी जमीन की तलाश में थे, लेकिन इसमें भी उन्हें कामयाबी नहीं मिली। आखिरकार सुभाष यादव ने पप्पू यादव की पार्टी की रुकनीयत तस्लीम कर लिया। लालू को ये इंतिख़ाब में कितना नुकसान पहुंचाएंगे ये तो बाद में पता चलेगा, लेकिन वे अपने तीर से लालू राबड़ी को परेशान तो करते रहेंगे।

 

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