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‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ को सेंसर बोर्ड ने नहीं दिया सर्टिफिकेट

मुंबई : केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने प्रकाश झा की नई फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ को सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया है. अलंकृता श्रीवास्तव के निर्देशन में बनी इस फिल्म को प्रकाश झा ने प्रोड्यूस किया है. फिल्म में रत्ना पाठक शाह, कोंकणा सेन शर्मा, विक्रांत मैसी, अहाना कुमरा, प्लाबिता बोरठाकुर और शशांक अरोड़ा ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं. फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं दिए जाने के फैसले की बॉलीवुड की कई हस्तियों ने निंदा की है.

वैसे ये पहला मौका नहीं जब प्रकाश झा की फिल्म को CBFC की सख्ती का सामना करना पड़ा है. इससे पहले झा की फिल्म ‘गंगाजल’ को रिवाइजिंग कमेटी ने 11 कट्स के साथ यू/ए सर्टिफिकेट दिया था. इसके खिलाफ झा फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल में गए थे. ट्रिब्यूनल ने फिल्म को बिना किसी कट के यू/ए सर्टिफिकेट दिया था.

‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ पर असंस्कारी होने का ठप्पा लगाने से CBFC के अध्यक्ष पहलाज निहलानी का नाम फिर सुर्खियों में है. CBFC ने फिल्म प्रोड्यूसर प्रकाश झा को एक चिट्ठी भेजकर कारण साफ किया है कि क्यों फिल्म को प्रमाणित नहीं किया गया है.

चिट्ठी में लिखा है- ‘फिल्म की कहानी महिला आधारित है और जीवन से इतर उनकी फैंटेसियों को दिखाया गया है. इसमें यौन दृश्य, अपमानजनक शब्द और अश्लील ऑडियो है. यह फिल्म समाज के एक विशेष वर्ग के प्रति अधिक संवेदनशील है. इसलिए फिल्म को प्रमाणीकरण के लिए नामंजूर किया जाता है.’

निर्देशक ने कहा- हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं
‘लिपिस्टिक अंडर माय बुर्का’ की निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव ‘राजनीति’ जैसी फिल्मों के लिए प्रकाश झा को असिस्ट कर चुकी हैं. ग्लासगो से अलंकृता श्रीवास्तव ने इंडिया टुडे से फोन पर सेंसर बोर्ड के इस फैसले पर नाराजगी जताई.

अलंकृता ने कहा कि सेंसर बोर्ड में डॉयलॉग के लिए कोई जगह नहीं है. कलाकारों के नाते हमें अभिव्यक्ति की कोई स्वतंत्रता नहीं है. CBFC नहीं चाहता कि फिल्मों में हटकर कोई दृष्टिकोण पेश किया जाए.

अलंकृता के मुताबिक, CBFC की चिट्ठी को पाकर वह हैरान रह गईं जिसमें फिल्म को सर्टिफिकेट न देने की बात लिखी गई है.

इस फिल्म की कहानी में भारत के एक छोटे शहर की पृष्ठभूमि में दिखाई गई है. कहानी का तानाबाना चार महिलाओं की जद्दोजहद पर बुना गया है. ये महिलाएं आजादी की तलाश में हैं. जो खुद को समाज के बंधनों से मुक्त करना चाहती हैं. बता दें कि यह फिल्म मुंबई फिल्म फेस्टिवल में लैंगिक समानता पर बेस्ट फिल्म के लिए ऑक्सफेम अवॉर्ड जीत चुकी है.

पहलाज निहलानी ने कहा बैन नहीं है
CBFC के चेयरमैन पहलाज निहलानी ने इस मुद्दे पर कहा है कि उन्होंने अपना काम किया है और अब फिल्म के निर्माता ऊपरी संस्था या कोर्ट कहीं भी जा सकते हैं. निहलानी के मुताबिक, उन्होंने एक चिट्ठी जारी की है, जिसमें कारण बताने के लिए कहा गया है. ये बैन नहीं है और ना ही विवाद है.

बॉलिवुड में कई हस्तियों ने ‘लिपिस्टिक अंडर माय बुर्का’ को सर्टिफिकेट नहीं दिए जाने की निंदा की है. इनमें फिल्मकार फरहान अख्तर और पूजा भट्ट शामिल है. निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा है कि अब वक्त आ गया है कि इंडस्ट्री मिलकर लड़ाई लड़े. विवेक अग्निहोत्री के मुताबिक वो पूरी तरह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में हैं. प्रकाश झा को इस पर चुप नहीं बैठना चाहिए और लड़ना चाहिए.

फिल्म निर्देशक अशोक पंडित ने CBFC के फैसले की निंदा करते हुए कहा है कि ये पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए दुखी होने वाली बात है. पंडित ने प्रकाश झा को देश का नामचीन फिल्मकार बताते हुए कहा कि उन्हें इस तरह के फैसले का नुकसान झेलना पड़ रहा है. पंडित ने कहा कि सेंसर बोर्ड के चेयरमैन पहलाज निहलानी के बर्ताव पर वो आपत्ति जताते हैं. ये शर्मनाक है और इस तरह चीजों को हैंडल नहीं किया जाना चाहिए.

वकील और कार्यकर्ता आभा सिंह ने कहा कि वो नहीं समझतीं कि ‘लिपिस्टिक अंडर माय बुर्का’ जैसी फिल्म पर सेंसर बोर्ड या अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को कोई परेशानी होनी चाहिए. आभा सिंह ने कहा कि ये अच्छी बात है कि फिल्मकार ऐसे संवदेनशील विषयों पर फिल्में बना रहे हैं.

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