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लॉंग मार्च के सियासी जमातों पर मुसबत असरात

अदलिया, फ़ौज और सियासी ताक़तों ने पीपल्ज़पार्टी को ये हौसला दिया कि वो बिला ख़ोफ़-ओ-ख़तर आम इंतिख़ाबात की तरफ़ जा सकती है और कोई भी उस की राह में रुकावट नहीं बन सकता ,तहरीक मिनहाजुल-क़ुरआन के लॉंग मार्च के सबब मुल्की निज़ाम में क्य

अदलिया, फ़ौज और सियासी ताक़तों ने पीपल्ज़पार्टी को ये हौसला दिया कि वो बिला ख़ोफ़-ओ-ख़तर आम इंतिख़ाबात की तरफ़ जा सकती है और कोई भी उस की राह में रुकावट नहीं बन सकता ,तहरीक मिनहाजुल-क़ुरआन के लॉंग मार्च के सबब मुल्की निज़ाम में क्या इस्लाहात हुईं ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा, लेकिन तजज़िया निगारों और मुबस्सिरीन के मुताबिक़ मुल्की सियासत और सियासी जमातों पर इस के इंतिहाई गहरे असरात देखे जा रहे हैं।

सियासत पर असरात

तहरीक मिनहाजुल-क़ुरआन के सरबराह डाक्टर ताहिर उल-क़ादरी की सरबराही में होने वाले लॉंग मार्च ने रवां साल के इबतिदाई दो हफतों में ही अफ़्वाह साज़ फ़ैक्ट्रीयां बंद करदीं और आइन्दा इंतिख़ाबात की तारीख़ पर पड़ी गर्द भी साफ़ हो गई।सियासी बे यक़ीनी में भी वाज़ेह ठहराव महसूस किया जा रहा है।

ख़दशात और साज़िशें तहलील

लॉंग मार्च से कब्ल बड़ी सियासी जमातों की जानिब से जो ख़दशा ज़ाहिर किया जा रहा था कि शायद ये इंतिख़ाबात को मुल्तवी करने की कोई कोशिश है।सब से ज़्यादा कहे जाने वाले जुमले ये थे कि मार्च के पीछे नादीदा क़ुव्वतें , ऐस्टैबलिशमेंट या ग़ैर जम्हूरी अनासिर कारफ़रमा हैं, लेकिन अब ये सारे ख़दशात और साज़िशें हवा में तहलील हो गईं।

ज़बानी हमले बंद, पी पी, नून लीग क़ुरबत बढ़ी

सियासतदानों के एक दूसरे पर ज़बानी हमले बंद होचुके हैं। यही नहीं, बल्कि हुक्मराँ जमात पीपल्ज़पार्टी और अप्पोज़ीशन पार्टी मुस्लिम लीग नून के दरमियान फ़ासले ,क़ुर्बतों में बदल रहे हैं और ये ख़बरें गर्दिश में हैं कि पीर को सदर आसिफ़ अली ज़रदारी लाहौर जा रहे हैं जहां वोह न लीग के सरबराह नवाज़ शरीफ़ की रिहायश गाह पर उनसे मुलाक़ात करेंगे जिस में नवाज़ शरीफ़ के भाई की ताज़ियत के इलावा मौजूदा सियासी सूरत-ए-हाल पर भी बात होगी।

निगरां सेटअप के लिए राबतों की इबतिदा

मुबस्सिरीन इस मुलाक़ात को आइन्दा इंतिख़ाबात के तनाज़ुर में इंतिहाई अहम क़रार दे रहे हैं और निगरां सेटअप के लिए क़ियादत की सतह पर राबतों की इतबदा भी क़रार दे रहे हैं। ये लॉंग मार्च का ही नतीजा है कि जमहूरी कुव्वतों में एक एहसास तहफ़्फ़ुज़ पैदा हो रहा है क्योंकि अस्करी क़ियादत बज़ाहिर इस तमाम तर सूरत-ए-हाल से कोसों दूर नज़र आई।

मुस्लिम लीग नून की तन्हाई ख़त्म होगई

लॉंग मार्च ने जहां मुल्की सियासत पर असरात मुरत्तब किए वहीं सियासी जमातों के लिए मुस्तक़बिल की राहें भी वाज़ेह कर दीं। सियासी हलक़ों का ख़्याल है कि ये सूरत-ए-हाल हिज़्ब-ए-मुखालिफ़ की बड़ी जमआत मुस्लिम लीग नून के लिए इंतिहाई साज़गार साबित हुई। मुस्लिम लीग नून को शुरू ही से सियासी तन्हाई का ताना दिया जा रहा था, लेकिन लॉंग मार्च के दौरान उनके साथ अप्पोज़ीशन जमातों का खड़ा होना इस बात का ग़म्माज़ है कि वो अब अकेली नहीं।

ग्रैंड अलांइस पर इत्तिफ़ाक़

मुस्लिम लीग फ़ंकशनल के सरबराह पीर पगारा की मुस्लिम लीग नून के सरबराह नवाज़शरीफ़ से रायविंड में मुलाक़ात और इंतिख़ाबात में अप्पोज़ीशन के ग्रैंड अलाइंस पर इत्तिफ़ाक़ भी बहुत से सियासी हलचल का पेशख़ीमा साबित होगा खासतौर पर सिंध की सियासत में मुक़ाबले की फ़िज़ा का एक तास्सुर उभर का सामने आ रहा है। नवाज़ शरीफ़ सिंध में बलदियाती निज़ाम पर पहले ही क़ौम परस्त जमातों की काफ़ी हमदर्दीयां भी समेट चुके हैं।

पी टी आई की सियासी जमातों से दूरी

दूसरी तरफ़ पंजाब में मुस्लिम लीग नून की हरीफ़ समझे जाने वाली तहिरीक-ए-इंसाफ़ के लिए ये तजुर्बा कुछ अच्छा साबित नहीं हुआ। तहिरीक-ए-इंसाफ़ ने ना तो अप्पोज़ीशन का साथ दिया , ना ताहिर उल-क़ादरी का और ना ही हुकूमत का। अलग पोज़ीशन लेने पर अब वो सियासी जमातों से दूर खड़ी नज़र आ रही है। तहरीक के दरमयान अगरचे बयानात की हद तक इमरान ख़ान ताहिर उल-क़ादरी की हिमायत करते रहे लेकिन इन का ये मुतालिबा कि सदर ज़रदारी की मौजूदगी में शफ़्फ़ाफ़ इंतिख़ाबात का इनइक़ाद मुम्किन नहीं, आने वाले वक़्तों में दर्दे सर बन सकता है, क्योंकि आसिफ़ अली ज़रदारी के बतौर सदर किसी और जमात को उन पर इस किस्म का एतराज़ नहीं।

एम क्यू एम क़ौमी परवाज़ के मुम्किना नुक़्सान

हुकूमती जमात ऐम कियु ऐम की जानिब से पहले लॉंग मार्च में साथ शिरकत और बाद में अलहदगी के ऐलानात ने किसी हद तक हरीफ़ों को अपने ऊपर ज़बानी तौर पर हमला आवर होने की इजाज़त दी है।ऐम कियु ऐम से मुताल्लिक़ आम तौर पर यही कहा जाता है कि वो कराची और हैदराबाद में अपनी पोज़ीशन बरक़रार रखेगी। ताहम, बाज़ हलक़ों का ख़्याल है कि इस तरह के फ़ैसलों से उस की क़ौमी परवाज़ को नुक़्सान हो सकता है।

पी पी पी-कोई रुकावट नहीं

हुकमरां जमात पीपल्ज़ पार्टी से मुताल्लिक़ ये कहा जा रहा है कि अगरचे लॉंग मार्च के मुआमले पर उसे ज़्यादा फ़वाइद या नुक़्सानात तो नहीं हुए अलबत्ता इस के लिए ये तास्सुर ज़ाइल हो चुका है कि वो सियासी शहादत हासिल करना चाहती है । पीपल्ज़ पार्टी और उस की इत्तिहादी जमातें बेहतरीन हिक्मत-ए-अमली के तहत लॉंग मार्च के पुरअमन ख़ातमे का क्रेडिट भी लेने की कोशिश कर रही हैं। इस के इलावा अदलिया , फ़ौज और सियासी ताक़तों ने पीपल्ज़ पार्टी को ये हौसला दिया कि वो बिलाख़ोफ़-ओ-ख़तर आम इंतिख़ाबात की तरफ़ जा सकती है और कोई भी उस की राह में रकाट नहीं सकता।  (वसीम ए सिद्दीक़ी, कराची)

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