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लोकसभा इंतेखाबात : माया की मुर्तियों पर गिरेगा पर्दा!

Model Election Code of Conduct के मद्देनजर लोकसभा इंतेखाबात में भी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) चीफ मायावती और हाथियों की मूर्तियां एक बार फिर ढक दी जाएंगी। इलेक्शन कमीशन ने हालांकि अभी इस मुद्दे पर कोई हिदायत जारी नहीं किया है। गुजश्ता विधानसभा इंतेख

Model Election Code of Conduct के मद्देनजर लोकसभा इंतेखाबात में भी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) चीफ मायावती और हाथियों की मूर्तियां एक बार फिर ढक दी जाएंगी। इलेक्शन कमीशन ने हालांकि अभी इस मुद्दे पर कोई हिदायत जारी नहीं किया है। गुजश्ता विधानसभा इंतेखाबात के वक्त माया और बसपा के इंतेखाबी निशान हाथी की मूर्तियों को लेकर सूबे की सियासत में काफी बवाल मचा था।

सियासी पार्टियों कि तरफ से इन मूर्तियों पर ऐतराज़ दर्ज कराए जाने के बाद कमीशन ने सूबे के पार्को व यादगारों में लगी उस वक्त की सीएम मायावती और हाथियों की मूर्तियां ढकवा दी थीं।

बसपा के दौर ए इक्तेदार में रियासत की दारुल हुकूमत लखनऊ व नोएडा में माया की कुल 11 मूर्तियां बनवाई गई थीं। वहीं हाथियों की तकरीबन 300 मूर्तियां लगाई गई थीं। अकेले लखनऊ में मायावती की 9 मूर्तियां और नोएडा में दो मूर्तियां हैं। गोमतीनगर के भीमराव अंबेडकर में 96 लाख रुपये की लागत से बनी 24 फीट ऊंची कांसे की मुजस्समा भी इसमें शामिल है।

पिछली मर्तबा विधानसभा इलेक्शन के दौरान हाथी की करीब 90 और माया की 11 मूर्तियों को ढका गया था, जिस पर लाखों रुपये का खर्च आया था।

गौरतलब है कि पिछले विधानसभा इंतेखाबात के दौरान बसपा को छोड़ दिगर सियासी पार्टियों ने रियासत में लगी मायावती व हाथियों की मूर्तियों को लेकर कमीशन के सामने ऐतराज़ किया था। मुखालिफ पार्टियों ने स वक्त की सीएम मायावती पर इल्ज़ाम लगाया था कि उन्होंने सरकारी पैसों से अपनी और हाथी की मूर्तियां लगवाईं और उस पर बसपा का नाम भी लिखा।

उस वक्त चीफ इलेक्शन कमिशन ने फैसला किया था कि रियासत में जगह-जगह लगी हाथियों और मायावती की मूर्तियों को ढका जाएगा।

इलेक्शन कमीशन का कहना था कि चूंकि यह मामला जाब्ता इख्लाकी से जुड़ा है, ऐसे में क्मीशन का मकसद है कि इलेक्शन के दौरान किसी को भी सियासी फायदा न मिले। लिहाजा, मूर्तियों पर पर्दा डालने के फैसले पर अमल किया जाएगा। यहां तक कि उस वक्त दफ्तरों में लगे लीडरों की तस्वीरों को भी हटाया गया था।

इस फैसले से माया की अपोजिशन पार्टियों को बड़ी राहत मिली थी। हालांकि इस पर पलटवार करते हुए बसपा ने सवाल उठाए थे कि कांग्रेस के पंजे, समाजवादी पार्टी की साइकिल, भाजपा के कमल निशान के खिलाफ इलेक्शन कमीशन क्या कार्रवाई करेगा।

असेम्बली इलेक्शन 2012 से पहले मूर्तियां उत्तर प्रदेश में बसपा की इंतेखाबी हार-जीत का फैक्टर नहीं बनी थी। साल 2007 में जब बसपा अक्सरियत की हुकूमत बनी थी तो पार्टी ने 403 मेम्बरान की असेम्बली में 206 सीटें जीती थीं। तब सूबे में बसपा को मूर्तियों की बदौलत वोट नहीं मिले थे।

यही नहीं, जब साल 2009 में लोकसभा इंतेखाबात हुए तब मूर्तियां तो थीं लेकिन इलेक्शन में मुद्दा नहीं बनी थी। तब भी मायावती की पार्टी ने उप्र से 20 लोकसभा सीटें जीती थीं। लेकिन 2012 के असेम्बली इलेक्शन में मूर्तियों का बनना और ढकना चुनावी आंकड़ों पर जरूर असर डाल गया।

साल 2007 में बसपा ने 200 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर अपनी जीत दर्ज की थी। 2012 के असेम्बली इलेक्शन में बसपा 100 का आँकड़ा पार न करके सिर्फ 80 असेम्बली सीटों पर ही सिमट गई थी।

अलामिया तो यह है कि पहले के असेम्बली इलेक्शन 2012 की तर्ज पर लोकसभा इंतेखाबात 2014 के दौरान भी बसपा के इंतेखाबी निशान ‘हाथी’ और साबिक वज़ीर ए आला मायावती की उत्तर प्रदेश में लगी मूर्तियों को एक बार फिर ढकने की आवाज उठने लगी हैं। अब देखना यह है कि माया व हाथियों की मूर्तियों पर इलेक्शन कमीशन क्या फैसला लेगा।

ऐसा महसूस होता है कि इलेक्शन कमीशन भी दिगर सियासी पार्टियों की तरफ से इस मसले पर किये जाने वाले ऐतराज़ का इंतेजार कर रहा है। शायद यही वजह है कि कमीशन ने अभी तक इसकी कोई पालिसी तैयार नहीं की है।

इस बारे में चीम इलेक्शन कमीश्नर उमेश सिन्हा का कहना है कि इस बारे में कमिशन जो भी हिदायत देगा, उस पर अमल किया जाएगा।

बशुक्रिया: खास खबर

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