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लोक पाल पर कल जमाती इजलास इत्तिफ़ाक़ राय में नाकाम

नई दिल्ली १५ दिसम्बर: (पी टी आई) वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह की जानिब से आज रात लोक पाल के मसला पर तलब करदा कल जमाती इजलास में इत्तिफ़ाक़ राय पैदा नहीं हो सका। तमाम सयासी पार्टीयों ने बाअज़ कलीदी मसाइल बिशमोल सी बी आई और कमतर ज़मुरा की दफ़तरीत

नई दिल्ली १५ दिसम्बर: (पी टी आई) वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह की जानिब से आज रात लोक पाल के मसला पर तलब करदा कल जमाती इजलास में इत्तिफ़ाक़ राय पैदा नहीं हो सका। तमाम सयासी पार्टीयों ने बाअज़ कलीदी मसाइल बिशमोल सी बी आई और कमतर ज़मुरा की दफ़तरीत की लोक पाल के दायरा में शमूलीयत के बारे में मुख़्तलिफ़ और मुतज़ाद नक़ात नज़र ज़ाहिर की।

ताहम 4 घंटा तवील इजलास के बाद ये सवालात पैदा हो गए हैं कि क्या ये बिल पार्लीमैंट के मौजूदा इजलास में जो 22 डसमबर को इख़तताम पज़ीर होगा, मंज़ूर किया जा सकेगा। कई सयासी पार्टीयां हुकूमत से कह रही हैं वो उजलत में कोई फ़ैसला न करे क्योंकि ये मुआमला दूर रस असरात मुरत्तिब करेगा। ज़राए के बमूजब पार्लीमैंट का ख़ुसूसी इजलास तलब करने की तजावीज़ पेश की गईं जिन में कहा गया हीका इत्तिफ़ाक़ राय पैदा करने केलिए मज़ीद मोहलत दी जानी चाहिये।

वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने सयासी पार्टीयों से पार्लीमैंट के जारीया इजलास में लोक पाल बल की फ़ौरी मंज़ूरी को यक़ीनी बनाने केलिए सयासी पार्टीयों से तआवुन तलब किया था। उन्हों ने कहा था कि बिल पार्टी सियासत का शिकार नहीं होना चाहिये, क्योंकि हुकूमत पार्लीमैंट में इत्तिफ़ाक़ राय से इस की मंज़ूरी में गहिरी दिलचस्पी रखती है क्योंकि ऐवान ही क़ानूनसाज़ी का मुहाफ़िज़ है।

सयासी पार्टीयों से इस इंतिहाई अहम मुआमला में रहनुमाई और तआवुन तलब करते हुए वज़ीर-ए-आज़म ने कहाकि वो शख़्सी तौर पर फ़ौरी क़ानूनसाज़ी की इत्तिफ़ाक़ राय से मंज़ूरी में गहिरी दिलचस्पी रखते हैं। तमाम सयासी पार्टीयों को मुम्किना हद तक इत्तिफ़ाक़ राय पैदा करना चाहीये और इस मुआमला को किसी भी तरह पार्टी सियासत का निशाना नहीं बनाना चाहीये। मुख़्तलिफ़ नक़ात नज़र मुख़्तलिफ़ सयासी पार्टीयों की जानिब से कल जमाती इजलास में पेश किए गये।

बी जे पी ने लोक पाल के दायरा में ज़मुरा सी और डी सरकारी मुलाज़मीन को शामिल करने की ताईद की लेकिन सी पी आई ने इस मौक़िफ़ की सख़्ती से मुख़ालिफ़त की। बी जे पी और दीगर अपोज़ीशन पार्टीयों ने मुतालिबा किया कि सी बी आई तहक़ीक़ाती महिकमा को लोक पाल के तहत लाया जाना चाहीये।

ताहम बाएं बाज़ू और दाएं बाज़ू दोनों की पार्टीयों ने वज़ीर-ए-आज़म को लोक पाल के तहत लाने के बारे में यकसाँ राय ज़ाहिर की। सी पी आई क़ाइद गुरूदास दास गुप्ता ने कहा कि इन की पार्टी का ख़्याल है कि ज़मुरा सी और डी मुलाज़मीन को लोक पाल के तहत नहीं लाया जा सकता क्योंकि ऐसे मुलाज़मीन करोड़ों हैं।

इन के साथ निमटने के लिए अलहदा निज़ाम होना चाहीये। सी पी आई ऐम ने सी पी आई के साथ ज़मुरा सी और डी मुलाज़मीन को लोक पाल बल के तहत लाने के सिलसिला में मुख़्तलिफ़ राय दी। सी पी आई ऐम के क़ाइद सीताराम यचोरी ने कहा कि उन्हें लोक पाल के दायरा कार में शामिल किया जाना चाहीये।

ताहम उन्हों ने हुकूमत से कहा कि इस के लिए अलहदा निज़ाम ज़रूरी है और हमें हुकूमत से ख़ाहिश करनी चाहीए कि इस बारे में ठोस तजावीज़ पेश करें। यचोरी ने कहा कि सी पी आई ऐम चाहती हीका सी बी आई की जानिब से जिन करप्शन मुक़द्दमात से निमटा जा रहा है, उन्हें भी लोक पाल के तहत लाया जाय क्योंकि तहक़ीक़ाती महिकमा के बगै़र लोक पाल मउसर नहीं होगा।

हुकूमत ने इस पर कहा कि सी बी आई करप्शन के इलावा दीगर मुक़द्दमात से भी निमटती है। इस पर सी पी आई ऐम क़ाइद ने कहा कि हुकूमत को इस के बारे में सूचना चाहीये। सीताराम यचोरी ने कहा कि हुकूमत ने लोक पाल बिल जारीया इजलास में पेश करने का कोई तीक़न नहीं दिया। लोक सभा में क़ाइद अपोज़ीशन सुषमा स्वराज ने कहा कि हुकूमत को जारीया इजलास में ही लोक पाल बिल पेश करना चाहीए क्योंकि वज़ीर-ए-आज़म बज़ात-ए-ख़ुद इस सिलसिला में अन्नाहज़ारे को तीक़न दे चुके हैं।

ताहम हुकूमत ने ये बिल पेश करने का कोई तीक़न नहीं दिया और सिर्फ इतना कहा कि हुकूमत कोशिश करेगी। मर्कज़ी वज़ीर फ़ीनानस परनब मुकर्जी ने कहा कि ऐसे मुख़्तलिफ़ नक़ात नज़र सयासी पार्टी की जानिब से और असटानडनग कमेटी की जानिब से भी पेश किए गए हैं।

चुनांचे इन सब को बल में शामिल करना एक मुश्किल मसला ही। कल जमाती इजलास में बी जे पी अपने मौक़िफ़ पर अटल रही कि स्टै‍डि‍ग् कमेटी में हस्सास मसाइल पर नाज़ुक मौक़िफ़ पैदा होगया था। सी पी आई क़ाइद डी राजा ने कहा कि अगर ज़रूरी हो तो मौजूदा पारलीमानी इजलास में तौसीअ की जानी चाहीए या फिर बाद में ख़ुसूसी इजलास तलब किया जाना चाहीये। यू पी ए की हलीफ़ सयासी पार्टीयों बिशमोल तृणमूल कांग्रेस और डी ऐम के लोक पाल बल के सिलसिला में हुकूमत की ताईद में रहें।

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