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लोक पाल बिल जारीया सेशन में पेश करने का यक़ीन

नई दिल्ली, १६ दिसम्बर: (पी टी आई) लोक पाल मसला पर कल जमाती इजलास में इत्तिफ़ाक़ राय ना होने का एतराफ़ करते हुए वज़ीर-ए-पार्लीमानी उमोर पवन कुमार बंसल ने आज कहाकि हुकूमत को इस बात का यक़ीन है कि वो जारीया सरमाई सैशन के दौरान ही मुजव्वज़ा ब

नई दिल्ली, १६ दिसम्बर: (पी टी आई) लोक पाल मसला पर कल जमाती इजलास में इत्तिफ़ाक़ राय ना होने का एतराफ़ करते हुए वज़ीर-ए-पार्लीमानी उमोर पवन कुमार बंसल ने आज कहाकि हुकूमत को इस बात का यक़ीन है कि वो जारीया सरमाई सैशन के दौरान ही मुजव्वज़ा बिल पेश करेगे।

उन्होंने कहाकि बिल पेश करना मुम्किन है। कल कुल जमाती इजलास में 35 सयासी जमातों ने शिरकत की थी और लोक पाल के मसला पर सब जमातों की राय मुख़्तलिफ़ देखी गई। उन्हों ने कहा कि लोक पाल पर वसीअ तर इत्तिफ़ाक़ राय पाए जाने की बात दरुस्त नहीं हो सकती। इस की वजह से हुकूमत पर काम के दबाओ में इज़ाफ़ा हो गया है।

बंसल ने कहाकि इन 35 मुख़्तलिफ़ सयासी जमातों की राय को यकजा किस तरह किया जाय ताकि हुकूमत मुजव्वज़ा बिल में ज़रूरी तरमीम करसकी, ये एक अहम मसला है। ताहम हुकूमत की मुम्किना कोशिश ये है कि इस बल को पार्लीमैंट के जारीया सैशन में पेश कर दिया जाये और उन्हें यक़ीन है कि ऐसा होगा। जब उन की तवज्जा इस हक़ीक़त की तरफ़ मबज़ूल कराई गई कि सैशन का सिर्फ एक हफ़्ता बाक़ी रह गया है तो उन्होंने कहाकि हमें सख़्त मेहनत करते हुए उसे मुम्किन बनाना होगा।

अगर ये काम 20 या 21 दिसम्बर तक भी करलिया जाय तो वो समझते हैं कि बल को जारीया सैशन में पेश करना मुम्किन होगा। इस बल को पेश करने के बाद एक दिन मुबाहिस होसकते हैं और दूसरे दिन राज्य सभा में मुबाहिस मुम्किन हैं। बंसल ने कहाकि कुल जमाती इजलास में लोक पाल पर कई नकात नज़र पेश किए गई। उन्हों ने बताया कि किसी तरह का इत्तिफ़ाक़ राय नहीं था।

बाज़ की ये राय थी कि हमें इस अमल में जलदबाज़ी की क्या ज़रूरत है। उन्हों ने कहाकि हमारा मक़सद मुख़्तलिफ़ सयासी जमातों की अलैहदा राय के पेशे नज़र मजमूई तौर पर मुत्तफ़िक़ा राय हासिल करना था। लेकिन ऐसा मुम्किन नहीं हो सका।

बाज़ ने ये राय दी कि ग्रुप सी मुलाज़मीन को लोक पाल के दायरा कार में लाया जाय और बाअज़ इस तजवीज़ के मुख़ालिफ़ थे कयवन का इस ज़मुरा में तक़रीबन 35 लाख मर्कज़ी मुलाज़मीन शामिल हैं। ये सवाल भी उठाया गया कि एक ही इदारा इन तमाम के ख़िलाफ़ शिकायात की किस तरह यकसूई कर पाएगा।

उन्हों ने कहाकि हुकूमत ने इस मसला पर काम शुरू कर दिया है और इस की तमाम तर कोशिश ये है कि जल्द अज़ जल्द बल को पार्लीमैंट में पेश किया जाई।जब उन से पूछा गया कि अगर पार्लीमैंट के जारीया सैशन में ये बिल पेश ना किया जा सका तो क्या होगा? बंसल ने कहाकि फ़िलहाल ये सवाल ही पैदा नहीं होता इस लिए कोई भी तबसरा फ़िलहाल मुनासिब नहीं होगा।

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