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लोक लेखा समिति ने नोटबंदी पर रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल से पूछे दस सवाल

संसद की लोक लेखा समिति ने नोटबंदी के फैसले की समीक्षा के लिए वित्त मंत्रालय के आला अधिकारियों और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल को 28 जनवरी को अपने समक्ष पेश होने के लिए तलब किया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केवी थॉमस अध्यक्षता में बने इस समिति ने आरबीआई गर्वनर से लेकर दस सवाल पूछे हैं। दरअसल, यह सवाल नोटबंदी पर आरबीआई की भूमिका और उसके पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पूछा गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक, गवर्नर को ये सवाल समिति ने बीते 30 दिसंबर को भेजे थे। अपने पहले सवाल में समिति ने पूछा है कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सदन में कहा है कि नोटबंदी का फैसला आरबीआई और इसके बोर्ड ने लिया। सरकार ने इस सलाह पर निर्णय लिया। क्‍या आप सहमत हैं। उसके बाद समिति ने पूछा कि आरबीआई ने कब तय किया कि नोटबंदी भारत के हित में हैं। उसने गर्वनर से पूछा कि रातों-रात 500 और हजार के नोटों को बंद करने के पीछे आरबीआई ने क्‍या तर्क पाए।

इसके बाद नोटबंदी की सिफारिश को लेकर भी सवाल किया गया है। इसमें पूछा गया है कि क्‍या आरबीआई ने स्पष्ट किया था कि 86 प्रतिशत नकदी अवैध होगी। और कितने समय में व्यवस्था पटरी पर लौट सकेगी। अपने सातवे सवाल में समिति ने पूछा है कि फैसले के बाद बैंकों से दस हजार रुपये प्रतिदिन और बीस हजार रुपये प्रति सप्‍ताह निकासी की सीमा तय की गई। एटीएम से दो रुपये प्रतिदिन की सीमा तय की गई। किस कानून और शक्तियों के तहत लोगों पर अपनी ही नकदी निकालने की सीमा तय की गई। समिति ने आरबीआई गवर्नर से यह भी पूछा है कि करेंसी नोटों की सीमा तय करने की ताकत आरबीआई को किसने दी। क्‍यों न आप पर मुकदमा चलाया जाए और शक्‍त‍ियों का दुरुपयोग करने के लिए पद से हटा दिया जाए।

आरबीआई के अनुसार भारत में सिर्फ 500 करोड़ रुपये की जाली करेंसी है। जीडीपी के मुकाबले भारत में नकद 12 फीसदी था, जो कि जापान (18%) और स्विट्जरलैंड (13%) से कम है। भारत में मौजूद नकदी में उच्‍च मूल्‍य के नोटों का हिस्‍सा 86% था, लेकिन चीन में 90% और अमेरिका में 81% है। ऐसी कौन-सी चिंताजनक परिस्थिति थी कि नोटबंदी का फैसला लिया गया। 8 नवंबर को होने वाली आपातकालीन बैठक को लेकर भी समिति ने सवाल पूछा है कि आरबीआई बोर्ड सदस्‍यों को कब नोटिस भेजा गया था। उनमें से कौन-कौन इस बैठक में आया और यह बैठ कितनी देर तक टली थी।

उसने यह भी पूछा है कि नोटबंदी के दौरान आरबीआई के नियमों में बार-बार बदलाव क्‍यों हुए। उस आरबीआई अधिकारी का नाम बताएं जिसने निकासी के लिए लोगों पर स्‍याही लगाने का विचार दिया। शादी से जुड़ी निकासी वाली अधिसूचना किसने तैयार की। अगर यह सरकार ने किया था तो क्‍या अब आरबीआई वित्‍त मंत्रालय का एक विभाग है? अपने दो अंतिम सवाल में समिति ने पूछा है कि कितने नोट बंद किए गए और कितनी पुरानी करेंसी जमा हुई है। उसके बाद समिति ने पूछा है कि आरबीआई आरटीआई के तहत मांगी जाने वाली जानकारी क्‍यों नहीं दे रहा?

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