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लड़कियों की दाख्ला पर पाबंदी की खबर बेबुनियाद

शहर के मदरसा अजिजिया में दाखला से मुतल्लिक़ सगरिया वक़्फ स्टेट के मुत्वली ने कहा की हम ने इस्लाम असूल के मुताबिक दाखला पर पाबंदी आईद की थी क्योंकि इस मदरसे से मैं न तो लेडी मुदर्रिस हैं और न ही लड़कियों को पढ़ाने का कोई नज़्म। ऐसे हालात

शहर के मदरसा अजिजिया में दाखला से मुतल्लिक़ सगरिया वक़्फ स्टेट के मुत्वली ने कहा की हम ने इस्लाम असूल के मुताबिक दाखला पर पाबंदी आईद की थी क्योंकि इस मदरसे से मैं न तो लेडी मुदर्रिस हैं और न ही लड़कियों को पढ़ाने का कोई नज़्म। ऐसे हालात में बेगैर मुतबादिल तलाश किए लड़कियों के दाखला पर पाबंदी लगाई गयी थी क्योंकि वहाँ क्या हो रहा है इस का इल्म हमें है मगर कुछ लोगों की मुदाखिलत और बार बार खबर छपने के बाद हमने दाखला की इजाजत दी और दाखला हुआ भी मगर कुछ लोग इस पर आज भी सियासत कर रहे हैं। उन्होने कहा की ये मदरसा है और मदरसे में तौर तरीका भी है।

लड़कियों की तो मर्द और औरत के दरमियान पर्दे का हुक्म है और मैंने इसी के मुताबिक काम किया मगर मुदाखिलत के बाद हमने दाखला की इजाजत भी दी और दाखला भी हुआ। बताया जाता है की मदरसा अजिजिया में लगी इजाजत मतव्लि ने दी और दाखला हुआ। इस मुतल्लिक़ प्रिन्सिपल ने ये ज़रूर बताया था की आलिम की सीट कम रहने की वजह से दाख्ले में दुश्वारी पेश आ रही है इस खबर को भी मीडिया ने शाया किया था। और यूनिवर्सिटी से मुतालिबा किया था की सीट में इजाफा किया जाय इस मुतल्लिक़ ये भी कहा जाता है की मदरसे में उर्दू ऑनर्स की सीट कम रहने की वजह से लोगों को दुश्वारीय हो रही थी. प्रिन्सिपल दीगर सबजेक्ट में दख्ला की बात कहते चले आ रहे हैं। मगर सिर्फ उर्दू ऑनर्स के लिए लोग मुतालबे पर अड़े थे।

ये भी बताया जाता है की ऊपर दर्जे का दाखला लड़कियों का हुआ है वास्तनिया और फ़ोकानिया में दाखला नहीं लिया जा रहा है। क्योंकि पाबंदी आईद कर रखी है इस बात का इंकिशाफ बारहा प्रिन्सिपल करते चलाए आए हैं। प्रिन्सिपल ने भी बताया की दाखले के बाद मतूली ने नोटिस भी रवाना किया मगर शायद प्रिन्सिपल ने पूरी बात का इंकिशाफ नहीं किया और न ही बताया की नोटिस की हकीकत क्या थी आज मतूली और मदरसे पर फ्लिस्तीनी कानून का मुहर लगा रहा है। लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं मगर ये बात जेहन नशीं नहीं कर रहे हैं की इस तरह की हरकत से सिर्फ मदरसा बदनाम हो रहा है मतूली तो आज है कल नहीं भी हो सकता है मगर मदरसा तो हमेशा से है और रहेगा ज़रूरी है की क़ौम के लोग इस पर तवाज्जो दें ताकि मदरसे का वकार बना रहे।

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