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वकीलों की हड़ताल से अदालती काम काज ठप

इलाहाबाद हाईकोर्ट में अदालती काम काज उस वक़्त ठप पड़ गया जब सेंटर्ल एडमिनिस्ट्रेटीव ट्रब्यूनल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और दीगर अदालती मजालिस ने बार कौंसल आफ़ इंडिया की तलब कर्दा मुल्क गीर हड़ताल पर लब्बैक कहते तमाम सरगर्मीयां ठप कर दी ।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में अदालती काम काज उस वक़्त ठप पड़ गया जब सेंटर्ल एडमिनिस्ट्रेटीव ट्रब्यूनल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और दीगर अदालती मजालिस ने बार कौंसल आफ़ इंडिया की तलब कर्दा मुल्क गीर हड़ताल पर लब्बैक कहते तमाम सरगर्मीयां ठप कर दी ।

हड़ताल मुजव्वज़ा हायर एजूकेशन-ओ-रिसर्च बिल के ख़िलाफ़ तलब की गई थी । मुख़्तलिफ़ अदालतों के बाब उल-दाख़िलों पर वुकला जमा हो गए और वहां मुजव्वज़ा ( विवादित) बिल के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की जिस का मक़सद मुल्क में क़ानूनी तालीम को बाक़ायदा बनाना है लेकिन उसे बार कौंसल आफ़ इंडिया की जानिब से शदीद मुख़ालिफ़त का सामना है ।

अदालतों में जहां क़ानूनी सरगर्मीयां ठप पड़ गईं वहीं मुख़्तलिफ़ मुआमलात की यकसूई ( निवारण) के लिए दूर दराज़ से आने वाले अफ़राद को शदीद मुश्किलात का सामना करना पड़ा । शहर के किसी भी इलाक़ा से तशद्दुद की कोई इत्तिला नहीं है क्योंकि माज़ी क़रीब में वुकला की जानिब से किए जाने वाले एहितजाजी मुज़ाहिरे तशद्दुद का शिकार हो गए थे ।

दरीं असना ( यद्वपि) हाइकोर्ट बार एसोसीएसन ने ऐलान किया कि इन की हड़ताल कल भी जारी रहेगी जबकि डिस्ट्रिक्ट बार एसोसीएसन का कहना है कि वुकला जुमा तक अदालतों का बाईकॉट करेंगे ।अदालत में आने वाले एक शख़्स ने कहा कि हमें बड़ी मुश्किल से हमारे मुक़द्दमात की अगली समाअत ( सुनवायी) के लिए तारीखें मिलती हैं और हड़ताल की वजह से हमारी आज की तारीख़ ज़ाए हो गई अब आइन्दा समाअत तक हमें ज़हनी उलझन का शिकार रहना पड़ेगा ।

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