Wednesday , September 27 2017
Home / Featured News / वक्त के साथ मुस्लिम वोटरों के बदलते रुख

वक्त के साथ मुस्लिम वोटरों के बदलते रुख

असम, पश्चिम बंगाल और केरल में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत जम्मू-कश्मीर के बाद सबसे अधिक है। जाहिर है कि अल्पसंख्यक समुदाय का वोट बैंक इन तीनों राज्यों में महत्वपूर्ण है। साथ ही सत्ता की चाभी किसे मिलती है, इसमें भी अल्पसंख्यक समुदाय की निर्णायक भूमिका है। इन तीनों राज्यों के मुस्लिम प्रतिनिधित्व वाले इलाकों में इस बार मतदान के बहुत अलग और चौंकाने वाले नतीजे देखने को मिले।
Facebook पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करिये
कांग्रेस के लिए बुरी खबर यह है कि केरल में कांग्रेस गठबंधन का प्रदर्शन पिछली बार की तुलना में बेहद खराब रहा है। हालांकि, इसी मामले में बंगाल से कांग्रेस के लिए जरूर अच्छी खबर आई है। वहां पार्टी के वोट प्रतिशत और सीटों में वृद्धि हुई है। असम में भी पार्टी को एक अतिरिक्त सीट मुस्लिम बुहल इलाके में जरूर मिली, लेकिन वोट शेयर में गिरावट दर्ज की गई है। मुस्लिम बहुल इलाकों में इन तीनों राज्यों से BJP के लिए एक अच्छी खबर जरूर है। BJP का वोट प्रतिशत पहले की तुलना में बढ़ा है।

असम में BJP की सरकार बनने जा रही है, लेकिन मुस्लिम प्रभुत्व वाले इलाकों का गणित थोड़ा अलग है। मुस्लिम आबादी वाले 36 सीटों में से कांग्रेस ने 15 सीटें जीती हैं। इसी क्षेत्र में 2011 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 14 सीटें मिली थी और AIAUDF ने 17 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार AIAUDF की सीटें घटकर 11 रह गई। इसका मतलब है कि इस इलाके में BJP को भी 8 सीटें मिलीं वहीं AGP ने दो सीटों पर जीत दर्ज की है।

केरल में LDF ने मुस्लिम बहुल इलाकों में बेहतर प्रदर्शन किया है। मुसिलिम बहुल इलाकों को लेफ्ट के लिए मुश्किल गढ़ माना जाता था, लेकिन इस बार समीकरण बदल गए। ऐसी 43 सीटों पर पिछले चुनाव में UDF ने 29 सीटें जीती थीं और लेफ्ट के हिस्से महज 14 सीटें आई। वहीं इस बार मुकाबल कांटे का रहा और उसके खाते में 22 सीटें आईं, जबकि UDF को 21 सीटें मिलीं। इन इलाकों में UDF के वोट शेयर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई और आंकड़ा 47.8 फीसदी से गिरकर 38.4 फीसदी ही रह गया।

पश्चिम बंगाल में लेफ्ट पार्टी की मुस्लिम बहुल इलाकों में ममता बनर्जी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। मुस्लिम आबादी वाले 65 सीटों में से 38 सीटें TMC कांग्रेस ने अपने हिस्से में झटक ली। 2011 में यह आंकड़ा 30 सीटों का था। वहीं इन इलाकों में TMC के वोट प्रतिशत में भी बड़ा इजाफा हुआ है और यह 29.3 फीसदी से 40.8 फीसदी हो गया। वहीं इसी क्षेत्र में लेफ्ट के वोट प्रतिशत में बड़ी गिरावट आई यह 41.7 फीसदी से घटकर महज 24.2 फीसदी रह गया।

TOPPOPULARRECENT