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वज़ारत अक़लियती उमूर का तालीमी हुक़ूक़ की ख़िलाफ़वर्ज़ियों का जायज़ा

नई दिल्ली, ०९ नवंबर ( पीटीआई) अक़लियती के तालीमी हुक़ूक़ की रियास्तों में हक़े तालीम क़ानून की मंज़ूरी के बावजूद ख़िलाफ़वर्ज़ियों के तसलसुल (निरंतरता) का इद्दिआ करते हुए वज़ीर-ए-क़लीयती उमूर (Minority Affairs Minister ) के रहमान ख़ान ने आज तजवीज़ पेश की कि ए

नई दिल्ली, ०९ नवंबर ( पीटीआई) अक़लियती के तालीमी हुक़ूक़ की रियास्तों में हक़े तालीम क़ानून की मंज़ूरी के बावजूद ख़िलाफ़वर्ज़ियों के तसलसुल (निरंतरता) का इद्दिआ करते हुए वज़ीर-ए-क़लीयती उमूर (Minority Affairs Minister ) के रहमान ख़ान ने आज तजवीज़ पेश की कि एक ज़ेली कमेटी एक आला सतही इदारा बराए तालीम के तहत क़ायम की जाए जो ऐसे मसाइल ( समस्याओं) का जायज़ा ले सके।

के रहमान ख़ान ने एक मुशतर्का इजलास में जिस की उन्होंने मर्कज़ी वज़ीर बराए फ़रोग़ इंसानी वसाइल (Human Resource Development Minister ) एम एम पल्लम राजू के साथ मुशतर्का सदारत की थी, ख़िताब करते हुए कहा कि वो काबीना के मुशावरती बोर्ड बराए तालीम से दरख़ास्त करना चाहते हैं कि वो अपने तहत एक ज़ेली कमेटी तशकील ( बना) दे ताकि अक़ल्लीयतों के दस्तूरी हुक़ूक़ की ख़िलाफ़वर्ज़ी का जायज़ा लिया जा सके और हक़ तालीम क़ानून पर मयस्सर अमल आवरी की जा सके।

रहमान ख़ान ने कहा कि कई रियास्तों में ऐसे क़वाइद/ कवायद (नियम/ Rules) मुक़र्रर किए जा चुके हैं और अक़ल्लीयतों का ताय्युन ( नियुक्ति) भी हो चुका है। हालाँकि ये उन के दायरा कार में शामिल नहीं है। उन्हों ने मज़ीद कहा कि एक वाज़िह हिदायत मर्कज़ की जानिब से रियास्तों को दी जानी चाहीए कि अक़ल्लीयत क्या है और अक़ल्लीयत कौन है।

उन्होंने कहा कि तालीमात का आला तरीन मुशावरती इदारा मुल्क में बोर्ड (परिषद) है जो रियास्ती वुज़राए तालीम, माहिरीन तालीम और मुख़्तलिफ़ शोबा-ए-हियात के माहिरीन पर मुश्तमिल ( आधारित) है। अब ये मर्कज़ का फ़र्ज़ है कि इस बात को यक़ीनी बनाए कि हक़ तालीम क़ानून पर अमलावरी (कार्यान्वयन/ Implementation) यकसाँ (एक समान के) तौर पर हो सके और रियास्तों के तवस्सुत से इख़्तेयारात फ़राहम किए जाएं कि वो क़वाइद ( Rules) का ताय्युन कर सके।

इन क़वानीन ( नियमों) की ख़िलाफ़वर्ज़ी दस्तूर के मुताबिक़ ना की जा सके। सरकारी स्कूल्स की काबिल-ए-रहम हालत पर तवज्जा मबज़ूल (आकृष्ट) करते हुए मर्कज़ी वज़ीर बराए अक़ल्लीयती उमूर के रहमान ख़ान ने कहा कि हक़ तालीम क़ानून लाज़िमी है और उस वक़्त तक मयस्सर साबित नहीं होगा जब तक कि सरकारी स्कूल्स का मयार यक़ीनी ना बनाया जा सके।

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