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वज़ारत क़ानून की लोक पाल बिल में तहफ़्फुज़ात की ताईद

मर्कज़ी वज़ारत क़ानून ने वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर के ओहदेदारों को तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने की ताईद करते हुए कहाकि लोक पाल बिल में उन्हें इस्तिस्ना दिया जाना चाहीए। हस्सास मसाइल जैसे क़ौमी सलामती के सिलसिले में वो इस्तिस्ना के मुस्तहिक़ हैं

मर्कज़ी वज़ारत क़ानून ने वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर के ओहदेदारों को तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने की ताईद करते हुए कहाकि लोक पाल बिल में उन्हें इस्तिस्ना दिया जाना चाहीए। हस्सास मसाइल जैसे क़ौमी सलामती के सिलसिले में वो इस्तिस्ना के मुस्तहिक़ हैं। ऐसा मालूम होता है कि पारलीमानी कमेटी के चंद अरकान भी इस तजवीज़ की ताईद में हैं।

वज़ारत क़ानून ने राज्य सभा की सिलेक्ट कमेटी के बैठक‌ पर लोक पाल बिल के बारे में इज़हार-ए-ख़्याल करते हुए कहाकि वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर के ओहदेदारों को तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने केलिए लोक पाल बिल के मुसव्वदे में तरमीम ज़रूरी नहीं है क्योंकि ख़ुद वज़ीर-ए-आज़म को भी हस्सास मसाइल(संवेदनशील मुद्दों) के सिलसिले में पूछताछ से इस्तिस्ना हासिल है।

इस सवाल पर कि क्या वज़ीर-ए-आज़म को मौजूदा मुसव्वदा क़ानून में क़ौमी सलामती, न्यूक्लियर तवानाई और नज़म-ओ-नसक़ आम्मा के सिलसिले में तहफ़्फ़ुज़ फ़राहम किया जाएगा, जो उन के मातहत मुख़्तलिफ़ ओहदेदारों का अहाता भी करेगा। वज़ारत क़ानून ने कहाकि ये शख़्सी तौर पर वज़ीर-ए-आज़म केलिए क़ाबिल इतलाक़ है।

मोतमदी (किसी भी तहक़ीक़ात) केलिए दस्तयाब है। जब बाअज़ कमेटी अरकान ने सवाल किया कि क्या क़ौमी सलामती के सिलसिले में लोक पाल वज़ीर-ए-आज़म से भी सवालात कर सकता है, वज़ारत के ओहदेदारों ने कहाकि ऐसी सूरत-ए-हाल में दफ़आत में तरमीम की ज़रूरत होगी।

वज़ारत के ओहदेदारों ने कहाकि दफ़आत में मुनासिब तबदीलीयां की जाएंगी। जिस की तजवीज़ सीनीयर अप्पोज़ीशन रुकन ने पेश की हैं कि मुसव्वदा क़ानून को साफ़ सुथरा बनाना ज़रूरी है। उन्होंने इस बात से भी सहमत किया कि जो लोग हस्सास मौज़ूआत से निमटते हैं उन्हें इस्तिस्ना हासिल होना चाहीए।

कमेटी के सदर नशीन सत्य बरत चतुर्वेदी ने मुबय्यना तौर पर कहाकि क़ौमी नुक़्ता-ए-नज़र इस मसले पर हासिल किया जाएगा कि किसे तहफ़्फ़ुज़ फ़राहम किया जाना चाहीए।अन्ना हज़ारे की रोकथाम करप्शन तहरीक का देरीना मांग‌ है कि लोक पाल बिल के दायरा कार में वज़ीर-ए-आज़म के बिशमोल हर शख़्स को लाया जाय।

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