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वज़ीर-ए-आज़म और मर्कज़ी वज़ीर देही तर कुयात में इख्तेलाफात्

वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह और मर्कज़ी वज़ीर देही तर कुयात जय राम रमेश ने हुकूमत की नुमाइंदा स्कीम महात्मा गांधी क़ौमी देही रोज़गार तमानीयत स्कीम के तहत जारी की जाने वाली उजरतों के बारे में मुस्तहकम मौक़िफ़ इख्तेयार् किया है, क़ब्ल

वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह और मर्कज़ी वज़ीर देही तर कुयात जय राम रमेश ने हुकूमत की नुमाइंदा स्कीम महात्मा गांधी क़ौमी देही रोज़गार तमानीयत स्कीम के तहत जारी की जाने वाली उजरतों के बारे में मुस्तहकम मौक़िफ़ इख्तेयार् किया है, क़ब्ल इसके कि वज़ीर-ए-आज़म की जानिब से उनकी हिदायात पर अमल आवरी के सिलसिले में कर्नाटक हाईकोर्ट में एक मुक़द्दमा के फ़ैसला को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया जाये।

मर्कज़ी फंड्स से चलाई जाने वाली इस स्कीम के तहत हुकूमत सौ रुपये फ़ी शख़्स रोज़ाना उजरत साल में सौ दिन तक फ़ी ख़ानदान अदा करने की पाबंद है। बाअज़ रियास्ती हुकूमतें अक़ल्ल तरीन उजरतों में काफ़ी ज़्यादा इज़ाफ़ा कर चुकी हैं। इस रक़म की बनिसबत जिसका मर्कज़ी हुकूमत की रोज़गार स्कीम में ताय्युन किया गया था, गुज़श्ता साल 23 सितंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने उजरतों के ताय्युन को ये कहते हुए बर्ख़ास्त कर दिया था कि शरहों का फ़ैसला ऐसे अंदाज़ में क्या जाना चाहीए कि वो मर्कज़ी हुकूमतों की मुक़र्रर करदा अक़ल्ल तरीन उजरतों से ज़रई मज़दूरों के शोबा में उनके इलाक़ों में कम ना हूँ।

आंधरा प्रदेश हाईकोर्ट से इसी नौईयत के फ़ैसला की तवक़्क़ो करते हुए मर्कज़ ने फ़ैसला किया है कि सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक हाईकोर्ट के फ़ैसला को चैलेंज किया जाये और इसके लिए एक ख़ुसूसी दरख़ास्त दाख़िल की जाये, लेकिन मर्कज़ी वज़ीर देही तर कुयात जय राम रमेश ने इसकी मुख़ालिफ़त करते हुए कहा कि क़ब्लअज़ीं 7 दिसंबर 2010-को अटार्नी जनरल, सदर नशीन क़ौमी मुशावरती कौंसल बराए सोनीया गांधी ने वज़ीर-ए-आज़म को 11 नवंबर 2010 को एक मकतूब रवाना करते हुए महात्मा गांधी क़ौमी देही रोज़गार तमानीयत स्कीम में और अक़ल्लतरीन उजरत क़ानून में तबदीली की ताईद की थी, ताकि उनके बारे में इत्तेफाक़् राय पैदा किया जा सके।

काफ़ी ग़ौर-ओ-ख़ौज़ के बाद हुकूमत ने 23 जनवरी 2011को सुप्रीम कोर्ट में ख़ुसूसी दरख़ास्त पेश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फ़ैसला पर हुक्म अलतवा जारी करने से इनकार कर दिया। ख़ुसूसी दरख़ास्त के पसेपर्दा वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह और वज़ीर देही तर कुयात जय राम रमेश के दरमयान कई मुलाक़ातें और कई मुक्तो बात का तबादला भी है, जिसमें उन्होंने इस मसला पर अटल मौक़िफ़ इख्तेयार् किया है, जो बिलकुल नुमायां है।

मुक्तो बात से ज़ाहिर होता है कि मर्कज़ हाईकोर्ट के फ़ैसला को चैलेंज करना चाहता है। समाजी कारकुन सुभाष अग्रवाल ने इन मुक्तो बात की नकलें हक़ इत्तिलाआत क़ानून के तहत हासिल कर ली हैं।

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