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वरुण गांधी आखिर नरेंद्र मोदी के खिलाफ क्यों बोल रहे हैं !

पीलीभीत से बीजेपी एमपी वरुण गांघी के सियासी पैतरे से कौन वाकिफ नहीं है | चौकाने वाली बात यह हैं कि इस बार वरुण अपनी ही पार्टी बीजेपी के खिलाफ बिगुल फूक रहे हैं| जुमे के रोज़ वरुण गांधी ने खुलासा किया है कि कोलकाता में हुई नरेंद्र मोद

पीलीभीत से बीजेपी एमपी वरुण गांघी के सियासी पैतरे से कौन वाकिफ नहीं है | चौकाने वाली बात यह हैं कि इस बार वरुण अपनी ही पार्टी बीजेपी के खिलाफ बिगुल फूक रहे हैं| जुमे के रोज़ वरुण गांधी ने खुलासा किया है कि कोलकाता में हुई नरेंद्र मोदी की जनचेतना रैली में असल में जितने लोग पहुंचे, वह उनके पार्टी साथियों के दावों के मुकाबले में एक-चौथाई थे। वरुण ने कहा कि रैली में सिर्फ 40 -50 हजार लोग ही आये थे जबकि बीजेपी दो लाख भीड़ का दावा कर रही हैं|

दरअसल, कुछ दिन पहले कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मोदी की जनचेतना रैली से भरा हुआ था जिसके बाद बीजेपी ने दावा किया कि मोदी की रैली में दो लाख लोग आये थे मोदी की रैली से पहले इसी ग्राउंड पर मगरिबी बंगाल की वज़ीर ए आला ममता बनर्जी की रैली हुई थी जिसमे लाखों की भीड़ उमड़ी थी| सियासी नजरिये से सभी की निगाहे नरेंद्र मोदी की जनचेतना रैली पर टिक गयी थी|

इस रैली में मंच से मोदी ने दिल्ली में थर्ड फ्रंट के लीडरो पर निशाना लगाया और कहा कि दिल्ली में जो थर्ड फ्रंट के लीडर बैठे है वो हेलीकाप्टर लेकर आये और यहाँ का नज़ारा देख लें कि हवा का रुख किस तरफ हैं| मोदी का इशारा तकरीर में उमड़ी भीड़ की तरफ था | साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कोलकाता में इतनी आवाम कभी नहीं देखे। यह सही है भी था क्योंकि मगरिबी बंगाल से एक सीट जीतने वाली बीजेपी के लिए हजारों की भीड़ जुटना भी खास था| बाद में रैली को लेकर दावा किया गया कि इसमें दो-तीन लाख लोग मौजूद थे और 50 हजार को तृणमूल कांग्रेस ने पहुंचने नहीं दिया। लेकिन बीजेपी के ही लीडर वरुण गांधी ने मोदी और दूसरे बीजेपी लीडरों के दावों की हवा निकाल दी|

बीजेपी के मगरिबी बंगाल के इंचार्ज वरुण गांधी ने कहा कि, “रैली की कामयाबी को ओके कहा जा सकता है, मेरा जवाब बेहतरीन इसलिए नहीं हैं क्योंकि “आपके आंकड़े गलत हैं।” उन्होने कहा कि यह सच नहीं है कि इस रैली में दो लाख लोग जुटे थे। भीड़ तकरीबन 45 से 50 हजार थी।”

वरुण का मुतनाजो से गहरा नाता रहा है| मिशन 2014 के मद्देनजर बीजेपी के सदर राजनाथ सिंह ने वरुण गांधी को यूपी में जनरल सेक्रेटरी बनाकर उत्तर प्रदेश की सियासत में दोनो (चचेरे) भाइयों को आमने-सामने कर यूपी में बड़ा दाव खेलने की कोशिश की थी|

बात यह भी हैं कि सियासी नजरिये से भी कोलकाता का ब्रिगेड परेड ग्राउंड बड़ा ही अहम माना जाता है। सियासत के माहिरीन कहते हैं कि इस मैदान में जुटने वाली भीड़ यह बता देती है कि किसी सियासी पार्टी और लीडर को कितनी ताईद मिल रही है| वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस ने हुकूमत संभालते हुए जब-जब रैलियां की, लाखों लोग जुटे। पार्टियों का दावा है कि इन रैलियों में 3 से 8 लाख लोग तक जुटे।

पीलीभीत कोतवाली में वरुण गांधी के खिलाफ 153ए, 295 ए, 505 (2) और 125 आवामी नुमाइंदगी एक्ट की दफा में मुकदमा दर्ज करा दिया। मुकदमा दर्ज होते ही मायावती की हुकूमत ने वरुण गांधी को ना सिर्फ गिरफ्तार किया बल्कि रासुका भी लगा दी थी। लेकिन बसपा की हुकूमत को इक्तेदार से बेदखल कर रियासत की सत्ता सँभालने वाले अखिलेश यादव ने सब कुछ पलट दिया।

स्क्रिप्ट कहीं और लिखी गयी लेकिन उसकी गवाह बनी पीलीभीत का सीजेएम कोर्ट जहाँ वरुण के खिलाफ कोई गवाह खड़ा ही नहीं हुआ नतीजे में सीजेएम अब्दुल कयूम ने हुक्म दिया कि मुंदर्जा ए बाला की बुनियाद पर मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि मुल्ज़िम वरुण गांधी के खिलाफ लगाए गए इल्ज़ामात को इस्तेगाशा / प्रासीक्यूटर साबित कर पाने में नाकाम रहा लिहाजा मुल्ज़िम बरी किए जाने के काबिल हैं।

भड़काऊ तकरीर के मामले में इलेक्शन कमीशन ने जहाँ वरुण को नोटिस जारी किया था वहीँ उनके खिलाफ मुजरिमाना मामला भी दर्ज हुआ था। लेकिन न वरुण के खिलाफ मामला चल सका और न उनको सजा मिली ऐसा कुछ भी नहीं होगा।

—————बशुक्रिया: पर्दाफाश

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