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वाजपेयी को भारत रत्न क्यों ?

हैदराबाद: एमआईएम के लीडर और एमपी असदुद्दीन ओवैसी ने भारत रत्न और पद्मविभूषण इनाम से जुड़े मोदी सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए हैं.

हैदराबाद: एमआईएम के लीडर और एमपी असदुद्दीन ओवैसी ने भारत रत्न और पद्मविभूषण इनाम से जुड़े मोदी सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए हैं. ओवैसी ने कहा कि साबिक पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न और साबिक नायब वज़ीर ए आज़म लालकृष्ण आडवाणी को पद्म विभूषण इनाम देना गलत था. असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बाबरी मस्जिद को गिराने में अटल बिहारी का हाथ था.

ओवैसी ने कहा, “वाजपेयी को भारत रत्न दिया गया, क्या हम भूल गए कि 5 दिसंबर, 1992 की अपनी तकरीर में वाजपेयी ने कहा था कि ज़मीन को बराबर करना पड़ेगा. यह वीडियो आज भी यू-ट्यूब पर मौजूद है. जिस वाजपेयी ने कहा था कि क्या कल हम पत्थरों के ऊपर बैठेंगे. पत्थरों को साफ करके जमीन पर बैठेंगे. आज ऐसे शख्स को भारत रत्न अवॉर्ड दिया गया है. हम इस हुकूमत से इंसाफ की उम्मीद नहीं कर सकते.”

ओवैसी ने ये बातें इतवार के रोज़ हैदराबाद में एक किताब के रस्म इज़राई के मौके पर मुनाकिद प्रोग्राम में कहें मोदी सरकार ने बीजेपी के बानी रूकन और साबिक वज़ीर ए आज़म अटल बिहारी वाजपेयी को 27 मार्च को मुल्क के सबसे बड़े शहरी के एज़ाज़ भारत रत्न से नवाज़ा था. वाजपेयी 1998 से 2004 के बीच मुल्क के पीएम रहे हैं. इन दिनों वह अपनी लंबी उम्र और अपनी खराब सेहत की वजह से सियासत से दूर हैं.

वाजपेयी को बीजेपी का उदार चेहरा माना जाता रहा है.

आपको बता दें कि 6 दिसंबर 1992 को हिंदू कारसेवकों की भीड़ ने फोर्स की मौजूदगी में बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया था, जिसके बाद मुल्क में दंगे फूट पड़े थे. बाबरी मस्जिद को गिराने की साजिश में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, हरि डालमिया, साध्वी ऋतंभरा और बीजेपी के कई दूसरे बड़े लीडरों के नाम हैं.

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