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विकार अहमद के दो साथी कांस्टेबल हत्या मामले में बाइज़्ज़त बरी

हैदराबाद 01 जून: हैदराबाद पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) को एक और बार मायूसी का सामना करना पड़ा जब अदालत ने विकार अहमद के दो साथीयों को पुलिस कांस्टेबल की हत्या करने के मामले में बाइज़्ज़त बरी कर दिया।

यह दूसरा मामला है कि जिसमें तहरीक ग़बला इस्लाम से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार युवकों की बारात हुई है। मई वर्ष 2010 को ए पी एस पी से जुड़े कांस्टेबल यू रमेश को नामालूम लोगों ने हुसैनीअलम वालगा होटल के सामने गोली मारकर हत्या कर दी थी जिसके नतीजे में एसआईटी ने एक मामला दर्ज करते हुए जुलाई 2010 को विकार अहमद और उसके साथियों अमजद अली उर्फ ​​सुलेमान, डॉक्टर हनीफ़, रियाज़ खान, जाकिर और अन्य को तहरीक ग़लबा इस्लाम संगठन से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

पुलिस ने अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट में यह दावा किया था कि विकार अहमद और उसके साथियों ने 18 मई वर्ष 2007 को मक्का मस्जिद बम विस्फोट के बाद मुस्लियों पर की गई फायरिंग का इंतेक़ाम लेने की ग़रज़ से बम विस्फोट की बरसी के अवसर पर पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया था। 7 वें एडिशनल मेट्रोपोलिटन सत्र न्यायाधीश की बैठक में कांस्टेबल की हत्या की सुनवाई के दौरान 7 अप्रैल वर्ष 2015 को विकार अहमद और उसके चार साथियों को नलगेंडा में फर्जी एनकाउंटर में मार डाला गया था।

इस मुठभेड़ के बाद मरने वाले युवा के माता-पिता ने यह आरोप लगाया था कि पुलिस के पास कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं थे और मामले में बारात के मद्देनजर उनका फर्जी एनकाउंटर कर दिया गया।

एसआईटी ने एनकाउंटर में मारे गए पांच आरोपियों के नामों को हज़फ कर दिया था जबकि विक़ार के दो साथीयों रियाज़ ख़ान और मोहम्मद अबदुलसईद पर मुक़द्दमा चलाया गया।

इस्तिग़ासा ने 31 गवाहों को अदालत में पेश किया था और उनके बयानात कलमबंद किए गए थे पुलिस की हर मुम्किन कोशिशों के बावजूद भी नौजवानों के ख़िलाफ़ लगाए गए इल्ज़ामात साबित न हो सके
जिसके नतीजे में उन्हें बाइज़्ज़त बरी कर दिया गया।

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