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विज़ारत अकलीयती उमूर ने मुख़तस बजट इस्तेमाल नहीं किया

पारलीमानी कमेटी ने विज़ारत अक़ल्लीयती उमूर के लिए बजट में मुख़तस जुमला रक़म में से 559 करोड़ रुपये इस्तेमाल ना करने पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए आज कहा कि ख़ाती रियास्तों को जवाबदेह बनाने के लिए मंसूबा बंदी कमीशन से मुशावरत के ज़रीये एक

पारलीमानी कमेटी ने विज़ारत अक़ल्लीयती उमूर के लिए बजट में मुख़तस जुमला रक़म में से 559 करोड़ रुपये इस्तेमाल ना करने पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए आज कहा कि ख़ाती रियास्तों को जवाबदेह बनाने के लिए मंसूबा बंदी कमीशन से मुशावरत के ज़रीये एक निज़ाम क़ायम किया जाना चाहिये ।

इस मआमले पर वज़ारत की कार्रवाई रिपोर्ट पर बे इतमीनानी ज़ाहिर करते हुए कमेटी ने कहा कि हुकूमत को ये मआमला मुनासिब सतह पर उठाना चाहिये ताके अक़लीयती बहबूद की स्कीमें बाअज़ रियास्तों की बे अमली की बिना पर मुतास्सिर ना हो सके ।

स्टैंडिंग कमेटी बराए समाजी इंसाफ़ ने जिस के सरबराह कांग्रेसी रुकन पार्लीमैंट हेमा नंद बिस्वाल हैं कहा कि साल 2010-11 के लिए बजट में बराए वज़ारत अक़ल्लीयती उमूर 2866 करोड़ रुपये मुख़तस किए गए थे ।

जिन में से 559.28 करोड़ रुपये इस्तेमाल नहीं किए गए । चुनांचे कमेटी ने क़ब्लअज़ीं सिफ़ारिश की थी कि वज़ारत को मुख़्तलिफ़ स्कीमस की अमल आवरी का तजज़िया करना चाहिये ताके बजट में मुख़तस रक़म में 313 करोड़ रुपये का इज़ाफ़ा जो साल 2012-13 में किया गया है मुकम्मल तौर पर इस्तेमाल किया जा सके ।

ये रिपोर्ट आज लोक सभा में पेश की गई । वज़ारत अक़ल्लीयती उमूर ने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में जवाब देते हुए कहा था कि इस ने मुख़्तलिफ़ इक़दामात का तायुन किया है ताके रियास्तों को प्रोग्रामों की तशहीर की जा सके और स्कीमों की अमल आवरी में तेज़ रफ़्तार पैदा करने की तरग़ीब दी जा सके ।

ताहम कमेटी ने पता चलाया है कि ये इक़दामात मामूल की नौईयत के हैं चुनांचे कारआमद साबित नहीं होंगे । कमेटी ने अपनी साबिक़ा सिफ़ारिशात का इआदा किया कि हुकूमत को इंतिख़ाबी मयारों में नरमी पैदा करने के इमकान का जायज़ा लेना चाहिये ताकि उन्हें महरूम तालिबात की ताईद में मेरिट कम मेंसा स्कॉलर शपस स्कीम के तहत किया जा सके ।

कमेटी क़ब्लअज़ीं मायूसी के साथ तबसरा करचुकी है कि रियास्तें और मर्कज़ी ज़ेर-ए-इंतज़ाम इलाक़े जैसे उत्तरप्रदेश मग़रिबी बंगाल आसाम झारखंड उत्तराखंड जम्मू-ओ-कश्मीर और चन्दीगढ़ तालिबात को 30 फ़ीसद स्कालर शपस नहीं दे रहे हैं जैसा कि स्कीम में दर्ज किया गया है ।

कमेटी ने अक़ल्लीयती ख़वातीन की क़ियादत की ख़ुसूसीयात के फ़रोग़ की स्कीम जिस का आग़ाज़ जनवरी 2010 में किया गया था की अमल आवरी में ग़ैरमामूली ताख़ीर पर भी तशवीश ज़ाहिर की ।

ये मौक़िफ़ ज़ाहिर करते हुए कि कमेटी गहिरी तशवीश रखती है कि ये स्कीम जो अक़ल्लीयती ख़वातीन को बाइख़तियार बनाने में अहम किरदार अदा करसकती थी नाफ़िज़ ही नहीं की गई । कमेटी ने कहा कि मर्कज़ी वज़ारत अक़ल्लीयती उमूर को आजलाना इक़दाम करते हुए तायुन मुद्दत के साथ स्कीम पर अमल आवरी यक़ीनी बनाना चाहिये ।

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