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विरोध को कुचलने के लिए देशद्रोह कानून का इस्‍तेमाल कर रही है मोदी सरकार

ब्रिटेन की गैर सामाजिक संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत के देशद्रोह कानून की कड़ी आलोचना की है। इस कानून को भारत की मोदी सरकार द्वारा विरोध या सरकार की आचोलना कुचलने की कोशिश बताया गया है। संग़ठन की वार्षिक बैठक में एक रिपोर्ट पेश की गई जिसमें देशद्रोह कानून को लेकर मोदी सरकार की जमकर आलोचना की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं, उससे भी ख़राब हालात यह हैं कि उनको कई तरह के हमलों का भी इनको सामना करना पड़ रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर हमले आम बात है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह खतरा गैर-प्रशासनिक और प्रशासनिक ताकतों दोनों से ही है।

साथ ही रिपोर्ट ने भारत में कई गैर सामाजिक संस्थाओं और सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाईजेशन्स पर की गई कार्रवाई की भी आलोचना की गई है। वहीं संस्था ने गौरक्षा के नाम पर की जा रही गुंडागर्दी और हमलों को लेकर भी चिंता जताई है। गुजरात, मध्यप्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक में जाति के आधार पर और गौरक्षा के नाम पर की जाने वाली हिंसा पर चिंता जताई गई है।
साल 2016 में गुजरात के गिर-सोमनाथ जिले के उना कस्बे में 4 दलितों को एक एसयूवी कार से बांधकर कई लोगों ने पीटा था। इस वारदात के बाद गुस्साए दलितों ने राज्य में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए थे। ऐसी ही एक वारदात उत्तर प्रदेश में भी हुई, जिसमें बिसाहड़ गांव के अखलाक को गौमास खाने के शक पर उसके घर में घुसकर हत्या कर दी गई थी।

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