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विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों ने उमर और अनिर्बान की रिहाई की मांग के लिए किया मार्च

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नई दिल्ली: जेएनयू और अन्य विश्वविद्यालयों के हजारों छात्रों ने राजद्रोह के मामले में जमानत पर बाहर आये जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार के नेतृत्व में , मंगलवार को विरोध जुलूस में भाग लिया | ये मार्च शैक्षणिक संस्थानों पर कथित हमले के लिए और विश्वविद्यालय के दो छात्रों उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य की रिहाई और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के इस्तीफे की मांग के लिए मंडी हाउस से संसद तक किया गया था |

‘पीपुल्स मार्च टू सेव डेमोक्रेसी’ की तीसरी श्रृंखला में उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य जो संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी के खिलाफ हुए एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी नारे लगाने के संबंध में राजद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे हैं, के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए किया गया था |

कन्हैया ने कहा “यह मार्च सिर्फ उमर या कन्हैया को बचाने के लिए नहीं है,बल्कि यह लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के लिए है। जब देश में तानाशाही की बात आती है, शिक्षा संस्थान सबसे पहले प्रभावित होते हैं। आप जेएनयू और शिक्षा के पक्ष में बात करते हैं, तो आप समझ बनाने के बारे में बात कर रहे हैं।विश्वविद्यालयों पर हमला किया जा रहा है, मैं आप सभी को बताना चाहता हूँ कि अपने बच्चों पर भरोसा करिए । कुछ लोग हैं जो अराजकता फैलाना चाहते हैं। लेकिन उनसे डरना नहीं है बल्कि उन्हें बताना है कि आप यह सब नहीं कर सकते हैं। हम इस तरह के किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेंगे ” ।

छात्र नेता जिन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने 3 मार्च को जमानत दी थी, ने कहा, “हम राष्ट्र विरोधी नहीं हैं। हम आरएसएस विरोधी हैं। हम आपके राष्ट्रवाद से सहमत नहीं है। महिलाओं को अपने घरों से बाहर निकलना चाहिए। हम सेना पर राजनीति नहीं कर सकते हैं ।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री खुद को एक चाय बेचने वाले का बेटा कहते हैं लेकिन वह गरीबों के लिए क्या कर रहे हैं? “जिन लोगों को हाफ पेंट से पूरी पेंट प्राप्त करने में वर्षों लग गये हैं वो इस तरह देश को विभाजित नहीं कर सकते हैं। हर कोई भारत का एक हिस्सा है चाहे वह अल्पसंख्यक हों या दलित हों |

उन्होंने कहा कि हर कोई कह रहा है कि जेएनयू टैक्स पैयेर्स (करदाताओं ) के पैसे से चलता है विजय माल्या ने भी करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल किया है और वे लंदन भाग गये हैं इस बारे में सरकार क्या कर रही है ? वामपंथी पार्टी के नेताओं के डी राजा और सीताराम येचुरी ने भी मार्च में उपस्थित होकर आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की ।

लेखक-कार्यकर्ता अरुंधती रॉय ने भी मार्च को संबोधित किया और कहा कि हम क्रांतिकारी राजनीति देख रहे हैं,ये एक लड़ाई की शुरुआत है उनके बीच जो जानते हैं कैसे लड़ना है और कैसे नहीं | जिन लोगों को राष्ट्रद्रोही कहा जा रहा है वो प्रकृति प्रेमी हैं जो लोग खुद को राष्ट्रीयभक्त कह रहे हैं वो “चीजों को बर्बाद कर रहे हैं”|
इस बीच, भाषण के दौरान चार लोगों ने लगातर थोड़े थोड़े अंतराल पर कन्हैया पर हमला करने की कोशिश की जिन्हें बाद में हिरासत में ले लिए गया |

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