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विश्व मानव’ डॉ बी.आर. अम्बेडकर थे मजदूरों के ‘मसीहा’ :मोदी

imageनई दिल्ली: सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ बी.आर. की तुलना नागरिक अधिकारों के प्रतिष्ठित नेता मार्टिन लूथर किंग से करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा समाज के शोषित और वंचित वर्गों के लिए लड़ाई लड़ी।

प्रधानमंत्री मोदी ने वार्षिक अम्बेडकर मेमोरियल में व्याख्यान देते हुए कहा कि “बाबा साहेब अम्बेडकर ने मार्टिन लूथर किंग की तरह समाज समाज के शोषित और वंचित वर्गों के लिए लड़ाई लड़ी। बाबा साहेब हाशिए की आवाज थी। उन्होंने कहा कि वह ‘विश्व मानव’ थे। उनके बारे में केवल भारत के संबंध में बारे में बात अन्याय होगा । वह महान व्यक्ति हमेशा किसी भी अमानवीय व्यवहार या घटनाओं के खिलाफ थे |

प्रधानमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब सभी मजदूरों के ‘मसीहा’ था और उन्होंने ही श्रम कानूनों की नींव रखी थी |”डॉ अम्बेडकर ने श्रम सुधार के लिए और एक ही समय में भारत की प्रगति के लिए औद्योगीकरण की विचार किया था |

“उन्होंने कहा कि बाबा साहेब हमें 1956 में छोड़कर चले गये थे लेकिन आज उनके जाने के 60 वर्षों के बाद स्मारक की स्थापना की जा रही है। 60 साल बीत चुके हैं! मुझे नहीं मालूम कि मैं इसको कैसे समझाऊं ,लेकिन हम इस के लिए 60 साल तक इंतजार करना पड़ा है। शायद, मुझ पर बाबा साहेब का आशीर्वाद था और यह मेरे भाग्य में लिखा गया था।

प्रधानमंत्री मोदी भी इस मौक़े का इस्तेमाल दलितों और आदिवासियों को संबोधित करने के लिए किया |

उन्होंने कहा कि “बाबा साहेब कभी नहीं देख सकते थे कि कोई भी वंचित या पिछड़े रहे और ऐसा केवल दलितों और पिछड़ों के लिए नहीं था बल्कि ये टाटा बिड़ला जैसे परिवारों की महिलाओं के लिए भी था”।

“संसद में जलमार्ग पर एक बिल है, लेकिन मैं आपको बता दूँ ये विज़न डॉ अम्बेडकर का था वह भारत की समुद्री शक्ति में विश्वास करते थे। डॉ अम्बेडकर ने समाज को शिक्षित करने के लिए एक बात कही थी कि शिक्षा को समाज की आंतरिक शक्ति की तरह देखना चाहिए |

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