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वेटिकन में मदर टेरेसा को संत की उपाधि देने की प्रक्रिया शुरू , देश भर में हो रही हैं प्रार्थनाएं

वेटिकन सिटी।इटली का शहर रोम और उससे कुछ दूर है वेटिकन सिटी। वेटिकन सिटी दुनिया का सबसे छोटा देश है।भारत रत्न मदर टेरेसा को थोड़ी देर में वेटिकन सिटी में संत की उपाधि दी जाएगी। कैथोलिक ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरू पोप फ्रांसिस ये उपाधि देंगे। करीब 10 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। सुषमा स्वराज, अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी पहुंच चुके हैं। वेटिकन सिटी में टेरेसा को संत की उपाधि देने के पहले देश भर में प्रार्थनाएं हो रही हैं। लखनऊ, पणजी, चेन्नई और बेंगलुरु समेत देश के कई शहरों के चर्चों में प्रार्थना सभाएं हुईं।

संत की उपाधि दिए जाने वाले प्रोसेस को कांग्रेगेशन कहा जाता है। कुछ स्टेप्स होते हैं। जिसको उपाधि दी जानी है उसके बारे में लोग लिखित तथ्य देते हैं। जांच की जाती है। कांग्रेगेशन प्रोसेस में शामिल लोग अगर इस बात पर सहमत होते हैं कि व्यक्ति या महिला ने चमत्कारिक जीवन जिया है तो यह रिपोर्ट एक पैनल को दी जाती है। पैनल में डॉक्टर्स, तर्कशास्त्री, बिशप्स और कार्डिनल्स होते हैं। रिपोर्ट पोप को भेजी जाती है। इसके बाद पोप संत के लिए डिक्री साइन करते हैं।

मदर टेरेसा को दो चमत्कार की वजह से  संत की उपाधि मिली है | 1. ओडिशा की एक मोनिका बेसरा को पेट का अल्सर था। दावा है कि मिशनरी ऑफ चैरिटी की ननों द्वारा की गई प्रेयर से वो ठीक हो गया था। मोनिका ने कहा था कि उन्हें एक पोट्रेट से चमत्कारिक किरणें निकलती दिखाई दीं थीं। 2. ब्राजील में ब्रेन डिसीज से परेशान एक शख्स की फैमिली ने टेरेसा से प्रार्थना की। ये शख्स भी ठीक हो गया था।
गरीबों की सेवा के काम ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी की प्रमुख रही मदर को धरती की सबसे मशहूर महिलाओं में से एक बना दिया। मेसेडोनिया की राजधानी स्कोप्ये में कोसोवर अलबानियाई माता-पिता के यहां जन्मी मदर टेरेसा को 1979 में नोबल शांति पुरस्कार मिला था। उन्हें दुनियाभर में आत्म बलिदान एवं कल्याण से जुड़े ईसाई मूल्यों की एक मशाल के तौर पर देखा गया।

नोबेल पुरस्कार विजेता दिवंगत मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशिनरी ऑफ चेरिटी की ननों के मुताबिक मदर की लोकप्रियता के कारण रोम में होने वाले इस समारोह का दुनियाभर में विशेष महत्व होगा।

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