Thursday , August 24 2017
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वज़ारत की कुर्सी के बजाय मुस्लिम मसायल पर तवज्जो दी जाय

दानापुर : मदरसा सुवातुल कुरान के नाज़िम मौलाना अयुब निजामी कासमी ने अपने अखबारी ब्यान में कहा है की जुमा को नयी हुकूमत बन जाएगी वुजरा हलफ लेलेंगे और फिर चंद दिनों में क़लमदान की तक़सीम भी अमल में आ जाएगी । हुकूमत तशकील से कबल तसलसल के साथ ये आवाज बुलंद की गयी की डिप्टी सीएम का ओहदा , एसेम्बली स्पीकर का ओहदा और मुखतलिफ़ वज़ारतों की कुर्सी मुसलमानों को दी जाये, लेकिन मेरी राय ये है की वज़ारतों पर ज़ोर लगाने के बजाय मुस्लिम मसायल के हल पर ज़्यादा तवज्जो दी जाय। मुसलमानों की फ्लाह और तरक़्क़ी की रफ्तार को तेज़ की जाय। उन्होने कहा की तर्जियाती बुनियाद पर मुस्लिम मसायल हल किए जाएँ, महरूम तबका को इस का वाजिब हक़ दिया जाए। इस से हुकूमत और मेंबरान एसेम्बली पर अवाम का एतमाद बढ़ेगा और वो खुद को ठगा महसूस करेंगे।

उन्होने कहा की दूसरी सरकारी ज़ुबान उर्दू को तमाम स्कूलों, कॉलेजों में अमली तौर पर नाफ़िज़ किया जाय। सरकारी और इंतेजामिया के दफ़ातिर में उर्दू को अमली तौर पर रायज किया जाय, तमाम अक्लियती कॉलेज, स्कूल, अंजुमन, लाइब्रेरी और अक्लियत से मुतल्लिक़ सरकारी अदारों को इस का वाजिब हक़ दिया जाय, उन्होने कहा की वज़ारत की कुर्सी से कोई एख्तिलाफ़ नहीं, ये ज़रूर मिलनी चाहिए, मगर माजी के तजुर्बात बताता है की इस सिलसिले में मुसलमानों को मायूसी हाथ लगती है। आम तौर पर कुर्सियों के हुसूल के बाद लीडरान की ज़ुबान बंद हो जाती है, मुसलमानों के मसायल सर्द खाने में डाल दिये जाते हैं और ये रहनुमा हुकूमत के सामने बौने हो जाते हैं। अवामी नुमाइंदा का मक़सद बरसों के लिए खत्म हो जाता है। मौलाना निजामी ने वजीरे आला को उनका वायदा याद दिलाते हुये कहा की अब वो शराब पर पाबंदी लगाएँ, अक्लियती तालीमी अदारों के मसायल हल करें, उर्दू को रोज़ी रोटी से जोड़ें, प्राइवेट स्कूलों की फिश के मनमानी पर रोक लगाएँ, रोजगार, सेहत, कब्रिस्तान और मुदर्रिस के इशू पर संजीदगी से गौर करके इंसाफ के साथ तरक़्क़ी के नारा को शर्मिंदा ताबीर करें।

 

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