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वज़ीरे आला बनने के लिए न शक्ल है, न अक्लः शत्रुघ्न

भाजपा एमपी और एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि वो बिहार के वज़ीरे आला ओहदे की दौड़ में नहीं हैं। उन्होंने कहा न मेरी ख्वाहिश है और न ही मेरी तौकीह है वज़ीरे आला बनने की। सहाफ़ियों से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में शत्रुघ्न सिन्हा

भाजपा एमपी और एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि वो बिहार के वज़ीरे आला ओहदे की दौड़ में नहीं हैं। उन्होंने कहा न मेरी ख्वाहिश है और न ही मेरी तौकीह है वज़ीरे आला बनने की। सहाफ़ियों से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, “मेरे पास न शक्ल है, न अक्ल है। मुझे कौन बनाएगा वज़ीरे आला। ”
उन्होंने कहा, “मैं बस ये चाहता हूँ कि जो भी सामने आए वो बिहार को आगे बढ़ाए, बिहार का इक़्तेसाड़ी तरक़्क़ी करे। ”
नरेंद्र मोदी की क़ियादत वाली सरकार में वज़ीर नहीं बनाए जाने से जुड़े एक सवाल पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वज़ीर बनाना वज़ीरे आज़म का हक़ है। साथ ही उनका कहना था कि जिसे वज़ीर नहीं बनाया गया हो मुश्किल घड़ी में उससे मदद की ज़्यादा उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए।
सिन्हा ने कहा कि सियासत उनके लिए प्रोफ़ेशन नहीं, मिशन है और वो पार्टी में नो डिमांड, नो कमांड, नो कम्प्लेंट्स, नो एक्सपेक्टेशंस की हालत में काम कर रहे हैं।

पार्टी के सीनियर लीडर लाल कृष्ण आडवाणी को भी कोई ओहदा नहीं दिए जाने पर शत्रुघ्न सिन्हा बोले, “आडवाणी शायद आखिरी मुग़ल, आज के भारत के रियल स्टेट्समैन हैं। ” सिन्हा ने कहा कि लाल कृष्ण आडवाणी ऐसी चीज़ों से ऊपर हैं। उन्होंने कहा कि वो भी आडवाणी से सीख लेते हुए ख़ुद को ऐसी चीज़ों से परे रखते हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने आडवाणी को अपना फ्रेंड, फिलॉसफ़र, गाइड, गुरु और अल्टीमेट लीडर बताया।

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