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वज़ीरे तालीम के बयान पर भड़के एमएलए, सियासत तेज

कांग्रेस एसेम्बली दल के नायब लीडर केएन त्रिपाठी ने हुकूमत में शामिल अपने ही पार्टी के वज़ीरे तालीम गीताश्री उरांव को जाहिल और बद दिमाग बताया है। मिस्टर त्रिपाठी ने पार्टी के लीडर होने के नाते यह नसीहत दी है कि अगर मौका मिला है, तो र

कांग्रेस एसेम्बली दल के नायब लीडर केएन त्रिपाठी ने हुकूमत में शामिल अपने ही पार्टी के वज़ीरे तालीम गीताश्री उरांव को जाहिल और बद दिमाग बताया है। मिस्टर त्रिपाठी ने पार्टी के लीडर होने के नाते यह नसीहत दी है कि अगर मौका मिला है, तो रियासती मुफाद में काम करें, ऐसा कोई भी काम न करें, जिससे लासानी तफ़रीक़ पैदा हो। अगर हुकूमत की तरफ से साबिक़ में मुकर्रर किये गये क़वानीन को लेकर वज़ीरे तालीम को कोई परेशानी है तो उन्हें हुकूमत के सामने बात रखनी चाहिए थी। इस तरह का कोई भी फैसला लेने से पहले आम मंजूरी जरूरी है।

तालीम वज़ीर बनने के बाद गीताश्री उरांव जिस तरह का फैसला ले रही हैं, उससे यह साफ हो रहा है कि उनमें जानकारी की कमी है, बद दिमाग भी हो चुकी हैं, क्योंकि लासानी तफ़रीक़ पैदा करना आईनी के क़वानीन की खिलाफवर्जी है। कानून यह इजाजत नहीं देता कि ज़ुबान, ज़ात, नसल और मजहब की बुनियाद पर समाज को तोड़ा जाये।

कांग्रेस में शामिल लोग ज़ुबान और मजहब की बुनियाद पर तफ़रीक़ पैदा करेंगे तो लोगों का एतमाद पार्टी से उठेगा। इसलिए कोई भी बयान या फैसला लेने से पहले वज़ीरे तालीम को इस मौजू में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भोजपुरी और मगही पलामू डिवीजन के अलावा हजारीबाग, चतरा, धनबाद इलाकों में इस ज़ुबान का इस्तेमाल होता है।

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