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वज़ीर-ए‍-ख़ारिजा सुषमा स्वराज की वज़ीर-ए‍-ख़ारिजा फ़लस्तीन से बातचीत

रमला: वज़ीर-ए‍-ख़ारिजा सुषमा स्वराज ने आज वज़ीर-ए‍-ख़ारिजा फ़लस्तीन से बातचीत की। सुषमा स्वराज का इस्तेक़बाल फ़लस्तीन के नायब वज़ीर-ए‍-ख़ारिजा बराए एशीया सफ़ीर माज़िन शामियाने बिट्टू नया चौकी पर किया। जब कि वो इसराइल की सरहद पार कर के फ़लस्तीन में दाख़िल हुईं।

उनकी आमद के फ़ौरी बाद सुषमा स्वराज ने वज़ीर-ए‍-ख़ारिजा फ़लस्तीन रियाज़ अलमालिकी से बातचीत की। महात्मा गांधी के मुजस्समे पर फूल चढ़ाकर ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया। वज़ीर-ए‍-ख़ारिजा फ़लस्तीन ने हिन्दुस्तानी वज़ीर-ए‍-ख़ारिजा पर-ज़ोर दिया कि फ़लस्तीनी काज़ की ताईद जारी रखी जाये।

उन्होंने हिन्दुस्तान की जानिब से कई शोबों में बाहमी तआवुन में मदद पर इज़हारे इतमीनान किया। सुषमा स्वराज ने पुरज़ोर अंदाज़ में कहा कि फ़लस्तीन के मसले पर हिन्दुस्तान का मौक़िफ़ तबदील नहीं हुआ है। उन्होंने दोनों फ़रीक़ैन के दरमियान मुस्तहकम ताल्लुक़ात पर इज़हारे इतमीनान किया।

वज़ीर‌-ए‍-ख़ारिजा फ़लस्तीन के सरबराह बराए ज़राए इब्लाग़ डाक्टर वायल अलबतरीक़ी ने कहा कि फ़लस्तीनीयों ने हैरत ज़ाहिर की थी जब कि हिन्दुस्तान ने अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के फ़ोर्म में गुज़िशता साल राय दही में हिस्सा नहीं लिया था। कहा कि हिन्दुस्तान के उसूली मौक़िफ़ को फ़लस्तीन समझता है।

हिन्दुस्तान गुज़िशता साल पहली बार राय दही के दौरान गैरहाज़िर रहा था जब कि फ़लस्तीनी क़रारदाद अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के शोबे इन्सानी हुक़ूक़ में मंज़ूर की गई थी जिसके ज़रिये मुतालिबा किया गया था कि2014 के ग़ज़ा में तनाज़े में मुलव्वस फ़रीक़ैन को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए हिन्दुस्तान ने अपना ये मौक़िफ़ बरक़रार रखा था कि फ़लस्तीन काज़ की ताईद के इस के देरीना मौक़िफ़ में कोई तबदीली नहीं आई है।

सुषमा स्वराज को एयरपोर्ट पर कल शाम इसराइली ओहदेदारों ने सुर्ख़ क़ालीन इस्तेक़बाल किया था। फ़लस्तीनीयों के साथ बातचीत के बाद सुषमा स्वराज दो-रोज़ा दौरे पर वापिस इसराइल चली जाएँगी जहां उनकी बातचीत कई मसाइल पर दोनों ममालिक के दरमियान तआवुन के सिलसिले में इसराइल की आलासती क़ियादत से होगी|

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