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शब-ए-बरात गुनाहों से निजात की रात

इस्लामी कैलेंडर के माह शाबान की 15वीं शब 13 जून को मनाई जाएगी, जिसे शब-ए-बरात कहते हैं। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मौलाना सुब्हान रजा खां उर्फ सुब्हानी मियां ने इस रात की अहमियत बयान करते हुए कहा कि गुनाहों से निजात मिलती है और दुआ

इस्लामी कैलेंडर के माह शाबान की 15वीं शब 13 जून को मनाई जाएगी, जिसे शब-ए-बरात कहते हैं। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मौलाना सुब्हान रजा खां उर्फ सुब्हानी मियां ने इस रात की अहमियत बयान करते हुए कहा कि गुनाहों से निजात मिलती है और दुआएं कुबूल होती हैं।

सज्जादानशीन ने हदीस बयान करते हुए कहा कि प्यारे नबी (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) का फरमान है कि शाबान की 15वीं शब को नमाज पढ़ो और अगले दिन का रोजा रखो। उस रात आफताब यानी चांद गुरूब (छिपते) होते ही अल्लाह की खास तजल्ली पहले आसमान पर उतर आती है और हमारा रब इरशाद फरमाता है-कोई है, जो मुझसे मगफिरत, बख्शिश तलब करे, मैं उसे बख्श दूं। है कोई बंदा जो मुझसे रोजी, औलाद, सेहत, आफियत तलब करे और मैं उसे अता करूं।

गुरूब आफताब से सुबह सादिक तक अल्लाह की रहमत इसी तरह अपने बंदों को पुकारती रहती है। दूसरी हदीस में आया है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों से सालभर की नेकी और गुनाहों का हिसाब लेता है। इस रात को शब-ए-कद्र भी कहा जाता है। फरिश्ते अल्लाह के बंदों के लिए दुआएं करते हैं।

प्यारे नबी (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) का इरशाद है-रजब अल्लाह का, शाबान मेरा और माहे रमजान मेरी उम्मत का महीना है। इस रात में नेकियों की तलब और गुनाहों से बचने के साथ अपने रिश्तेदारों और अजीजों के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें।

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