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शब क़दर चशमा ख़ैर, क़ुरआन हकीम कलाम हक़त आला

हैदराबाद १७ अगस्त‌ डाक्टर सय्यद मुहम्मद हमीद उद्दीन शरफ़ी डायरेक्टर आई हरक ने कहा कि क़ुरआन हकीम ख़ालिक़ कायनात का कलाम बरहक़ और हुज़ूर ख़ातिम अलनबययन सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-आला वसल्लम का रफ़ी उल-शान माजज़ा अज़ीम है।

हैदराबाद १७ अगस्त‌ डाक्टर सय्यद मुहम्मद हमीद उद्दीन शरफ़ी डायरेक्टर आई हरक ने कहा कि क़ुरआन हकीम ख़ालिक़ कायनात का कलाम बरहक़ और हुज़ूर ख़ातिम अलनबययन सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-आला वसल्लम का रफ़ी उल-शान माजज़ा अज़ीम है।

क़ुरआन मजीद और साहिब क़ुरआन ई से मुहब्बत दलील ईमान, इस कलाम रब्बानीकी हर रोज़ तिलावत सआदत उज़्मा और मूजिब बरकात,क़ुरआन शरीफ़ की आयात केमआनी और मुतालिब समझना अलामत शरफ़-ओ-ख़ैर, करानी अहकाम-ओ-तालीमात पर ख़ुलूस दल के साथ अमल पीराई दुनिया-ओ-आख़िरत में भलाई और नजात का ज़रीया और दाइमी फ़ौज़-ओ-फ़लाह की ज़मानत ही। क़ुरान-ए-पाक के फ़ज़ल-ओ-शरफ़ का एक पहलू इस के नुज़ूल की रात का हज़ार महीनों से ज़्यादा बेहतर और फ़ज़ीलत से मुमताज़ हो जाना ही। कलाम पाक का पढ़ना , सुनना और अमल पीराई की नीयत से मआनी-ओ-मफ़ाहीम क़ुरआन का समझना यहां तक आयात करानी को देखना और तकते रहना भी नेकी, ख़ैर और सआदत है क़ुरान-ए-पाक की अज़मत-ओ-शान इस कलाम हक़ की हर आयत, हर लफ़्ज़ बल्कि हर हर्फ़ से नुमायां ही।

क़ुरआन हकीम उलूम-ओ-हिक्मत का मख़ज़न, नूर हिदायत, इसरार-ओ-मआरिफ़ का गंजीना, सारी इंसानियत का रहबर कामिल है इस की तालीमात हर दौर हरवक़त और हर एक के लिए आम हैं ये कलाम इलाही सुबह क़ियामत तक पूरी आदमियत के लिए सर चशमा हिदायत है ताहम वो ख़ुशनसीब हैं जो इस कलाम पाक से ख़ुसूसी तौर पर फ़ैज़ पा रहे हैं जिन्हें क़ुरआन मजीद ने अहल ईमान और मुत्तक़ियों के नाम-ओ-अलक़ाब से याद फ़र्मा कर उन सआदत वालों के ईमान-ओ-तक़वा कीतौसीक़ फ़र्मा दी ही।

इन ख़्यालात का मजमूई तौर पर इज़हार करते होई डाक्टर सय्यद मुहम्मद हमीदा लदेन शरफ़ी डायरेक्टर आई हरक ने शब क़दर के सिलसिला में मस्जिद मुहम्मद ये मुक्ता मदार साहिब ख़ैरत आबाद, जामि मस्जिद महबूब शाही माला कनटा मुअज़्ज़म जाहि मार्किट,हमीदिया शरफ़ी चमन , मस्जिद मुमताज़ मंशन लक्कड़ी का पुल, मस्जिद हुसैनी बंजारा हिलज़ रोड नंबर ३, मस्जिद कलां क़िला गोलगनडा , मस्जिद क़ादरिया अहमद नगर फ़रस्ट लांसर और जामि मस्जिद दोले ख़ां नवाब चंचल गौड़ा मैं मुनाक़िदा जलसा हाए शब क़दर में मुस्लमानों के कसीर इजतिमाआत से शरफ़ तख़ातब हासिल करते होई किया जब कि इन जलसों का एहतिमाम मुतज़क्किरा मसाजिद के मुतवल्लियों और इंतिज़ामी कमेटी की जानिब से किया गया था।

रात देर गए तक जारी रहने वाले ख़ताबात में उन्हों ने कहा कि अल्लाह ताला ने तमाम अनबया-ए-साबक़ीन को एक ना एक एजाज़-ओ-ख़ुसूसीयत से मुमताज़ फ़रमाया लेकिन अपना कलाम ख़ास क़ुरआनमजीद अपने हबीब ख़ातिम अलनबययन मुहम्मद मुस्तफ़ा सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-आला वसल्लम पर नाज़िल फ़रमाकर आप ई की ज़ात वाला को सब पर फ़ज़ीलत और फ़ौक़ियत दी।

क़ुरआन हकीम अहल सआदत के लिए वसीला नजात है । उन्हों ने अपने मख़सूस अंदाज़ तकल्लुम में बताया कि मुस्लमानों की सरबुलन्दी, इक़बाल-ओ-अज़मत का राज़ दरअसल क़ुरआन हकीम से रब्त-ओ-वाबस्तगी और हादी बरहक़ हुज़ूर अकरम सिल्ली अल्लाह अलैहि-ओ-आला वसल्लम से सच्ची मुहब्बत और आप ई की इत्तिबा में मुज़म्मिर ही। क़ुरान-ए-पाक का ये एजाज़ है कि इस की जिस क़दर तिलावत की जाय इतना हीरुहानी कैफ़-ओ-लुतफ़ हासिल होता है क़ुरआन शरीफ़ में दुनिया और हय्यात-ए-इंसानी के हर मसला का हल मौजूद ही।

क़ुरान-ए-पाक की तालीम और क़ुरआन फ़हमी की सरगर्म तहरीक और दीगर अक़्वाम-ओ-बिरादरान वतन तक क़ुरान-ए-पाक का पैग़ाम पहुंचाना आज का सब से अहम काम और हमारी ज़िम्मेदारी ही। तमाम जलसों में सामईन ने निहायत इश्तियाक़ के साथ शिरकत और समाअत की। हर ख़िताब के बाद बारगाह रिसालत ई में सलोৃ-ओ-सलाम का नज़राना गुज़राना गया और रक्त अंगेज़ दुआएं की गईं।

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