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शमसी तवानाई ( सौर उर्जा) का कल और आज

शमसी तवानाई (सौर उर्जा) का कल और आज बुनियादी तौर पर सोलर अनर्जी या शमसी तवानाई के इस्तेमाल का नज़रिया क़रीब ढाई सौ साल पुराना है।

शमसी तवानाई (सौर उर्जा) का कल और आज बुनियादी तौर पर सोलर अनर्जी या शमसी तवानाई के इस्तेमाल का नज़रिया क़रीब ढाई सौ साल पुराना है।

दिन भर सूरज की तवानाई ( उर्जा) को ज़ख़ीरा ( जमा/ stock) करके शब के अंधेरे में इसका इस्तेमाल बीसवीं सदी में शुरू हुआ। तजुर्बाती मरहले के बाद शमसी तवानाई का इस्तेमाल 60‍ के अशरे में मुम्किन हुआ। इस वक़्त एक सोलर सेल की क़ीमत इंतिहाई ज़्यादा यानी क़रीब 300 डालर फ़ी वाट थी।

इस वक़्त शमसी तवानाई ( सौर उर्जा) को बुनियादी तौर पर ख़लाई प्रोग्रामों के लिए काम में लाया जाता था। 1958 में Vanguard I वो पहला सेटेलाइट था, जिस में तवानाई ( उर्जा) के लिए शमसी शूवाओं का इस्तेमाल किया गया। जदीद दौर में शमसी तवानाई के इस्तेमाल को उस वक़्त फ़रोग़ हासिल हुआ जब 70 की दहाई में तेल पैदा करने वाले ममालिक ( देशों) की तंज़ीम ( संस्था) ओपेक ने कई मग़रिबी ममालिक ( पश्चिमी देशों) के लिए तेल की फ़राहमी बंद कर दी थी।

इसी वक़्त तवानाई के मुतबादिल ( अदल बदल होने वाले) ज़राए के एहमीयत उजागर हुई और तेल, गैस और कोयले से हट कर दीगर ( अन्य) ज़राए ( साधन) की खोज तेज़ तर कर दी गई। सूरत-ए-हाल पर क़ाबू पाने के लिए शमसी तवानाई ( सौर उर्जा) को ज़ख़ीरा (भंडार/ stock) करने की सलाहीयत रखने वाले सेल्ज़ (‍cell) ) की क़ीमत सैंकड़ों डालर से कम होकर 20 डालर फ़ी वाट तक गिर गई।

20 की दहाई तक शमसी तवानाई ( सौर उर्जा) से मुताल्लिक़ ( संबंधित) तकनीक, प्रोडक्ट्स और इस्तेमाल में अमेरीका सर फ़हरिस्त रहा, जहां लास एंजलिस की कंपनी Luz दुनिया भर में शमसी तवानाई ( सौर उर्जा) से मुताल्लिक़ अशीया का 95 फ़ीसद ( प्रतिशत) तैयार कर रही थी।

जैसे ही सस्ते दामों तेल की दस्तयाबी एक मर्तबा फिर मुम्किन हुई, शमसी तवानाई के इस्तेमाल में नुमायां कमी होने लगी। Luz कंपनी जल्द ही बंद हो गई। इसके इंतिज़ामीया ( व्यवस्थापकों) ने अमेरीकी हुकूमत पर शमसी तवानाई ( सौर र्जा) के माहौल दोस्त और दूर रस मुसबत असरात को नज़रअंदाज करने का इल्ज़ाम आइद किया।

अब एक मर्तबा फिर दुनिया भर में शमसी तवानाई ( सौर उर्जा) का इस्तेमाल फ़रोग़ पा रहा है। माहौल दोस्त तंज़ीमों के साथ साथ अवाम में भी इस की मक़बूलियत बढ़ रही है और यूरोप के ख़ुशहाल ममालिक से लेकर अफ़्रीक़ा के कई ग़रीब ममालिक में भी सोलर पैनल नसब दिखाई देते हैं।

शमसी तवानाई के इस्तेमाल के हवाले से इस वक़्त जर्मनी दुनिया का सर-ए-फ़हरिस्त मुल्क है, जहां शमसी तवानाई से
हासिल होने वाली मजमूई बिजली का पाँच फ़ीसद पैदा होता है। जर्मनी में 28 गीगा वाट की तवानाई के हामिल एक मिलीयन से ज़ाइद यूनिट्स हैं जिन में से बेश्तर शहरीयों के पास हैं।

दुनिया भर में शमसी पैनल्स तैयार करने वाली कंपनीयां अब ज़्यादा तादाद में और कम क़ीमत पर पैनल्स तैयार कर रही हैं।

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